हमले के बाद सकते में पाकिस्तान

Image caption दाता दरबार पर माहौल बहुत ही ग़मगीन है

पाकिस्तान के लाहौर शहर में ऐतिहासिक दाता दरबार दरगाह पर हुए आत्मघाती हमले में 42 लोगों के मारे जाने के बाद वहाँ बहुत दुख और ग़ुस्से का माहौल है.

कई राजनीतिक और धार्मिक नेताओं ने इस हमले की कड़ी आलोचना की है और इस पर गहरे दुख का इज़हार किया है.

पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा, "मैंने जाँच करने वाले अधिकारियों से साफ़ कह दिया है कि इस हमले के लिए ज़िम्मेदार लोगों को पकड़ना उनकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है और इस मामले में किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी."

दूसरी ओर, लाहौर में कई राजनीतिक और धार्मिक दलों के कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया है और उनसे इस्तीफ़ा देने की माँग की है.

गुरुवार के आत्मघाती हमले में 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं जिनमें से कई लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है.

इस हमले के बाद से लाहौर में रेड एलर्ट लागू कर दिया गया है कि बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं.

गुरुवार की रात को दो आत्मघाती हमलावरों ने सुरक्षाकर्मियों को चमका देकर दरगाह परिसर में प्रवेश किया जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें दरगाह से एक धड़ मिला है जिसे आत्मघाती हमलावर का माना जा रहा है, जाँच अधिकारियों का कहना है कि इससे यही पता लगता है कि हमलावर कम उम्र का नौजवान था.

मामले की जाँच शुरू हो गई है और जो सीसीटीवी फुटेज सामने आई है उसमें दो लोग भागते हुए दिखाई देते हैं जिसके बाद दो ज़ोरदार धमाके हुए, लाहौर से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इन दोनों लोगों ने सफ़ेद सलवार-कमीज़ पहनी थी और हरी पगड़ी बाँधी हुई थी.

मौक़े पर मौजूद कई लोगों का कहना है कि गुरुवार को दाता दरबार पर सबसे अधिक भीड़ होती है और इसीलिए हमलावरों ने गुरुवार शाम का वक़्त चुना.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षाकर्मियों ने इन लोगों को दरगाह परिसर में घुसने से रोका था लेकिन वे दौड़कर अंदर घुस गए और ख़ुद को उड़ा लिया.

बहुत लंबे अरसे बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि दाता दरबार को आम जनता के लिए बंद कर दिया गया है, दाता दरबार चौबीसों घंटे चलने वाले अपने लंगर के लिए मशहूर रहा है.

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