पाकिस्तान में चरमपंथ पर राष्ट्रीय सम्मेलन

लाहौर के दाता दरबार में धमाका
Image caption दाता दरबार हमले के बाद पाकिस्तान सरकार भारी दबाव में है

पाकिस्तान सरकार ने चरमपंथ से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाने की घोषणा की है और देश के सभी बड़े राजनीतिक दलों ने इस सम्मेलन में भाग लेने का फ़ैसला लिया है.

चरमपंथ के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलन बुलवाने का प्रस्ताव पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने शनिवार को एक पत्रकार वार्ता के दौरान दिया था.

उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार चरमपंथ के ख़ात्मे के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करने को तैयार है लेकिन अगर सरकार यह सम्मेलन बुलवाए तो उसका स्वागत किया जाएगा.

नवाज़ शरीफ़ ने यह भी कहा था कि इस सम्मेलन में सेना और ख़ुफ़िया एजेंसियों की भी राय ली जाए.

प्रधानमंत्री कार्यलय से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ ने टेलीफोन पर बात की और दोनों नेताओं ने आतंकवाद के ख़िलाफ राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति बनाने पर सहमति जताई.

बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने नवाज़ शरीफ़ के प्रस्ताव पर आतंकवाद और चरमपंथ के ख़िलाफ़ अगले सप्ताह राष्ट्रीय सम्मेलन बुलवाने की घोषणा की है.

राजनीतिक दलों में सहमति

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस मामले पर राष्ट्रीय सर्वसम्मति के लिए देश के सभी राजनीतिक दलों से संपर्क किया जाएगा और एक रणनीति तय की जाएगी.

इस सम्मेलन के अंत में चरमपंथ के ख़िलाफ एक सयुंक्त घोषणा पत्र जारी किया जाएगा.

बयान के मुताबिक़ यह सम्मेलन अगले सप्ताह इस्लामाबाद में आयोजित किया जाएगा और इससे पहले प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी गृह मंत्री, चारों प्रांतों के मुख्यमंत्रियों और प्रांतीय गृह मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता करेंगे.

इस बैठक में सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा की जाएगी.

चरमपंथ के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सम्मेलन में मुस्लिम लीग नवाज़, मुस्लिम लीग क़्यू, मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट और जमीयत-ए-उलेमा-ए-इस्लाम ने भाग लेने की पुष्टि की है.

मुस्लिम लीग नवाज़ के वरिष्ठ नेता राजा ज़फ़रुल हक़ ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, “पिछले कई सालों से देश आतंकवाद की चपेट में है लेकिन इतना समय बीत जाने के बावजूद भी सरकार इसे रोकने में असफल रही है.”

उन्होंने आगे कहा, “इस बात की समीक्षा करना बहुत ही ज़रूरी है कि क्या हमारी राजनीतिक इच्छाशक्ति में कमी है या ख़ुफ़िया एजेंसियों की चूक है.”

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार ने पिछले साल स्वात और क़बायली इलाक़ों में सैन्य अभियान से पहले एक सम्मेलन का आयोजन किया था जिसमें राजनीतिक दलों को उस कार्रवाई के लिए विश्वास में लिया गया था.

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