विकराल गरीबी बनी आत्महत्या की वजह

लाहौर
Image caption लाहौर में एक बड़ी आबादी गलियों में रहकर अपनी जीविका के लिए संघर्ष करती है

हर साल पाकिस्तान में ख़बरों की सुर्खियां रहती हैं-बाजार में बम धमाके, तालिबान से लड़ाई. लेकिन एक अहम बात जो लाखों पाकिस्तानियों के जीवन को प्रभावित करती है, वह सुर्खियों से नदारद रहती है.

यहां एक बड़ी आबादी को विकराल गरीबी से जूझना पड़ता है.

बीनिश की ज़िंदगी चाहे छोटी ही रह गई लेकिन वह कड़ी मेहनत और ऊँची उम्मीदों से जुड़ी रही.

बीनिश की उम्र 14 साल थी, वो पढ़-लिखकर डॉक्टर या नर्स बनना चाहती थीं. अपने सपने को पूरा करने के लिए उसने रात-दिन पढ़ाई की. रात में जब बिजली नहीं होती तो वे टॉर्च की रोशनी में पढ़ाई करती. वो हमेशा ही अपने क्लास में अव्वल आतीं.

दर्दनाक मौत

बीनिश की मौत अपने ही पिता अकबर के हाथों हुई. अकबर लाहौर के पूर्वी शहर में रिक्शा चलाते थे. अकबर ने बीनिश और उनकी दोनों बहनों को जहर देने के बाद खुद भी जहर खा लिया.

Image caption मुज़म्मिल अब अपनी बेटियों और अपने शौहर की मौत का मातम मना रही हैं

उनकी मां मुज़म्मिल उस समय घर के बाहर पानी लेने गईं थीं. जब वो वापस लौटीं तो उनकी सात साल की विकलांग बेटी कायनात जगी हुई थी.

अकबर ने इस बच्ची को भी जहर देने की कोशिश की लेकिन उसने यह कहकर लेने से इंकार कर दिया कि इसकी गंध अच्छी नहीं है. सो, वह इसे नहीं खा सकती.

बच्ची के पिता का कहना था कि अगर गरीबी की वजह से उनकी मौत हो जाती है, तो ये बच्चियां उनके बिना नहीं रह पाएंगी.

मुज़म्मिल अब अपनी बेटियों और अपने शौहर की मौत का मातम मना रही हैं. पति के बारे में बताते हुए वे रो पड़ती हैं, "वे बड़े ही नरम दिल और भले इंसान थे. बच्चों का वे काफी ख्याल रखते थे. हम दोनों के बीच कभी झगड़ा तक नहीं हुआ."

लेकिन इनके परिवार के ऊपर कर्ज़ का काफी बड़ा बोझ था जिसे वे चुका नहीं सकते थे. यह कर्ज़ 60,000 पाकिस्तानी रूपए यानि 700 डॉलर था.

बढ़ती आत्महत्याएं

पाकिस्तान में गरीबी की वजह से की जाने वाली आत्महत्या की घटनाएं काफी आम हैं. लेकिन ये ख़बरों में बमुश्किल जगह बना पाती हैं.

मुज़म्मिल का इलाज करने वाले डॉक्टर प्रोफ़ेसर जावेद अकरम का कहना है, "हर रोज हमें ऐसी 10 घटनाएं देखने को मिलती हैं. पहले लोग आत्महत्या के लिए छत से कूद जाते थे लेकिन अब जहर खाने की घटनाएं देखने को मिलती हैं. आत्महत्या की इन घटनाओं की एक खास वजह लोगों की गरीबी होती है."

पाकिस्तान में जानी मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता हीना जिलानी कहती हैं, "पाकिस्तान का रक्षा बजट बहुत अधिक है, जबकि लोगों की बुनियादी जरूरतों पर मामूली खर्च ही होता है. मानव सुरक्षा के मसलों को हमने नजरअंदाज कर दिया है."

हीना कहती हैं, "यह बड़े ही शर्म की बात है कि हम परमाणु शक्ति संपन्न देश तो हैं लेकिन लोगों को भोजन मुहैया नहीं करा सकते."

पाकिस्तान के सूचना मंत्री क़मर ज़मान कैरा गरीबों को सलाह देते हैं कि वे अपने बच्चों को चिल्ड्रेन होम्स में भेज दें.

मुज़म्मिल की ख़बर चर्चा में आने के बाद सरकार ने उन्हें आर्थिक मदद मुहैया कराई है. लेकिन अब उन्हें अपने पति और प्यारी बेटियों के बिना ही जिंदगी गुजारनी होगी.

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