स्वात में सेना पर गंभीर आरोप

स्वात
Image caption स्वात घाटी का इलाक़ा तालिबान का गढ़ रहा है

एक स्वतंत्र मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि पाकिस्तानी सेना ने वर्ष 2009 से अब तक चरमपंथ से ग्रसित क़बायली इलाक़े स्वात घाटी में 238 लोगों को ग़ैर क़ानूनी ढंग से गोली मार दी है.

संस्था ने पाकिस्तान की सरकार से माँग की है वह इन मौतों की जाँच करवाए.

पाकिस्तानी सेना ने इसका खंडन किया है और कहा है कि ऐसी रिपोर्ट पहले भी आ चुकी हैं लेकिन अब तक किसी की पुष्टि नहीं हुई है.

उल्लेखनीय है कि स्वात घाटी में वर्ष 2008 से तालिबान और अल-क़ायदा के चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सेना की कार्रवाई चल रही है.

इस कार्रवाई में दोनों ओर से सैकड़ों लोगों की जानें गई हैं.

हालांकि सैन्य अधिकारी कह रहे हैं कि वहाँ स्थिति अब नियंत्रण में है.

आरोप और खंडन

ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्वात घाटी में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ हुई कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने संदिग्ध लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया, उन्हें प्रताड़ित किया और उन्हें मौत के घाट भी उतार दिया.

Image caption पाकिस्तानी सेना पर पहले भी ऐसे आरोप लगाए गए हैं

संस्था के प्रवक्ता का कहना है कि सेना के इस व्यवहार के लिए उसे कभी दोष नहीं दिया गया.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने पाकिस्तान सरकार से इसकी जाँच की मांग की है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान सेना के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है.

लेकिन पाकिस्तान सेना के एक प्रवक्ता ने इसका खंडन किया है.

प्रवक्ता ने कहा है कि ऐसी कई रिपोर्ट पहले भी आई हैं लेकिन उनमें से किसी की भी पुष्टि नहीं हो सकी है.

उनका कहना है कि सेना स्वात या किसी अन्य जगह भी किसी भी ग़ैरक़ानूनी हत्या में शामिल नहीं रही है.

बीबीसी संवाददाता सोएब हसन का कहना है कि ह्यूमन राइट्स वॉच की यह रिपोर्ट उत्तर पाकिस्तान मे तालिबान के ख़िलाफ़ चल रही कार्रवाई में सेना की ज़्यादतियों की कई रिपोर्टों की कड़ी में एक और है.

स्वात में वर्ष 2008 से शुरु हुई कार्रवाई के बाद से ऐसे कई आरोप लगते रहे हैं और सेना के अधिकारी हमेशा इसका खंडन करते रहे हैं.

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