भारत-पाक वार्ता और हेडली की भूमिका

डेविड हेडली
Image caption भारत-पाक वार्ता में हेडली का मुद्दा प्रमुखता से उठा था

पाकिस्तान और भारत के बीच शांति की आशा निश्चित रुप से एक व्यक्ति के हाथों बंधक बनी हुई है.

दाऊद गिलानी उर्फ डेविड कोलमेन हेडली जिन्होंने ख़ुद पर लगे आरोप स्वीकार कर ख़ुद को मौत की सज़ा से बचा लिया है लेकिन भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंध अब भी उन से जुड़े हुए हैं.

इस्लामाबाद में 15 जुलाई को भारत और पाकिस्तान के बीच हुई शांति वार्ता भी डेविड हेडली की नज़र हो गई.

यह वार्ता गतिरोध पर समाप्त होने के बाद भारत के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से लगातार ऐसा वक्तव्य सामने आ रहे हैं जिन में डेविड हेडली की स्वीकृति को बुनियाद बना कर आरोप लगाए जा रहे हैं कि मुंबई पर नंबर 2008 में हुए आतंकवादी हमलों में ऐसे तत्व शामिल हैं जिन को पाकिस्तान की मदद हासिल थी.

भारत बार बार कहता आया है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को गंभीरता से ले और उस संदर्भ में भारत की चिंता को दूर करे.

भारत का कहना है कि उस ने इस संदर्भ में पाकिस्तान को सबूत भी दिए हैं लेकिन पाकिस्तान इन आरोपों का खंडन करता है और इस से भारत का दुष्प्रचार क़रार दे रहा है.

अमरीका ने हाल के दिनों में भारतीय जांचकर्ताओँ के एक दल को हेडली से एक हफ्ते तक खुल कर जाँच करने की अनुमति दी थी.

दोनों देशों ने तय किया था कि हेडली से हुई बातचीत को सर्वजानिक नहीं किया जाएगा लेकिन भारत ने जाँच के एक महीने बाद ही इस बातचीत को बुनियाद बना कर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाना शुरु कर दिया है.

कुछ देशी और विदेशी समाचार पत्रों ने यही ख़बरे भी प्रकाशित की हैं कि भारत की ओर से मिली जानकारी के आधार पर पाकिस्तान ने पूर्व सैन्य अधिकारियों ने जाँच शुरु की है लेकिन सरकारी स्तर पर अब तक इन ख़बरों की पुष्टि नहीं हुई है.

लेकिन सवाल यह है कि दोनों देशों को मुंबई हमलों के मामले को मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखना चाहिए या कूटनीतिक स्तर पर सहयोग का रास्ता लेना चाहिए.

भारतीय रवैया रुकावट..?

पाकिस्तान के दो पूर्व विदेश मंत्री यह समझते हैं कि भारतीय रवैया इस सहयोग में रुकावट बन रहा है.

विपक्षी पार्टी मुस्लिम नवाज़ के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सरताज अज़ीज़ कहते हैं, “शर्मल शेख़ में दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई थी कि आतंकवाद के कारण शांति प्रक्रिया को पटरी से उतरने नहीं देंगे लेकिन जब भारतीय विदेश मंत्री पाकिस्तान आए तो उन्होंने अपनी बातचीत केवल आतंकवाद पर सीमित रखी.”

उन्होंने आगे कहा, “इस वार्ता में बाक़ी मुद्दों पर सही बातचीत नहीं हुई जिसे से वार्ता में प्रगति की जो आशा की जा रही थी वह नहीं हो सकी.”

हेडली से जुड़ी भारत की ताज़ा मांग के बारे में उन का कहना था, “आरोप प्रत्यारोप से कोई काम नहीं चलेगा, बातचीत में सभी मुद्दों पर बात करनी चाहिए और मीडिया के माध्यम से मुद्दों को उछाला न जाए.”

पाकिस्तान के एक अन्य पूर्व विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कुसूरी समझते हैं कि भारत पाकिस्तान की मौजूदा परिस्थितियों से लाभ उठाना चाहता है इसलिए हेडली को महत्व दे रहा है.

उन्होंने कहा, “हमारे दौर में परिस्थितियाँ बेहतर थी इसलिए भारत भी हमें गंभीरता से लेता था. अभी समस्या यह है कि भारत ख़ुद स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान में किस से बात करे.”

उन्होंने आगे बताया, “आप को पता है कि पाकिस्तानी सरकार के बारे में प्रतिदिन ख़बरें आ जाती हैं कि आज सरकार गिरी या कल तो उस से भारत भी अनिश्चिता की स्थिति में है.”

ख़ुर्शीद कुसूरी ने बताया, “मुंबई हमलों में जो लोग पाकिस्तान में लिप्त थे सरकार ने उन के ख़िलाफ कार्रवाई की है और अदालत में मुक़दमा चल रहा है जबकि सरकार ने जमात-उल-दावा के प्रमुख हाफिज़ सईद को गिरफ्तार भी किया था लेकिन अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया. अब सरकार अदालती प्रक्रिया में हस्तक्षेप तो कर नहीं सकती है.”

पाकिस्तान गंभीरता से ले

ख़ालिद इक़बाल पाकिस्तानी वायुसेना के पूर्व अधिकारी हैं और अब क़ायदे आज़म विश्वविद्यालय इस्लामाबाद में पढ़ाते हैं. वे कहते हैं कि अतंरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि को बेहतर बनाने केलिए पाकिस्तान को भारतीय आरोपों को गंभीरता से लेना चाहिए.

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान को इन आरोपों में जवाब में निष्पक्ष जाँच करनी चाहिए ताकि पाकिस्तानी की स्थिति स्पष्ट हो सके.”

उन्होंने कहा, “अगर ऐसा को तथ्य सामने आए कि पाकिस्तान के कुछ लोग मुंबई हमलों में लिप्त हैं तो उन के ख़िलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.”

उन के मुताबिक पाकिस्तान को भी भारत की तरह अमेरिका जा कर हेडली से जाँच करनी चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पाकिस्तान की जो छवि ख़राब हुई है वह बेहतर हो सके.

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