स्वात में खाद्य आपूर्ति की दिक्कतें

पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में स्वात घाटी और अन्य इलाक़ों में रास्ते बंद होने से बाढ़ पीड़ितों को खाने पीने की वस्तुएं मिलने में दिक्कत हो रही है.

स्वात घाटी और उसके आस पास के इलाकों में पहले चरमपंथियों ने लोगों को घरों से निकालने पर मजबूर किया और अब बाढ़ ने इन लोगों को परेशान किया है.

सबसे ज़्यादा तबाही स्वाती घाटी से करीब 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मेदियान, बहरैन और कालाम में आई है.

तालिबान के मज़बूत गढ़ रह चुके इलाके ख़्वाज़ा ख़ेला और चारबाग़ से गुज़र कर मैं बाढ़ पीड़ितों का हाल पूछने गया.

यह वह इलाक़े हैं जहाँ करीब आठ महीने पहले सेना और तालिबान के बीच भारी संघर्ष हुआ था और सेना पर कई हमले भी किए गए थे.

बाढ़ के कारण मेदियान के पास सड़क टूटी हुई थी और करीब दो लिकोमीटर पैदल चल कर वहाँ पहुँचने में सफल रहा.

एक बूढ़े व्यक्ति अकबर ख़ान ने बताया, “हम घर में थे जब बाढ़ आई और हमने केवल अपने परिजनों को निकाला और बाक़ी पूरा सामान बाढ़ का पानी ले गया.”

उन्होंने आगे कहा कि परिजन दूसरों के घरों में रहने को मजबूर हैं.

'सिर्फ़ नाम लिखे जा रहे हैं'

सड़क टूटने की वजह से इन इलाकों में ख़ाने-पीने के सामान की भारी कामी हो गई है क्योंकि दूसरे इलाकों से जोड़ने के लिए यह एक मात्र सड़क थी.

लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने और खाने पीने के चीज़े देने के लिए सेना ने व्यापक स्तर पर अभियान शुरु किया है.

बुधवार को सेना के हेलीकॉप्टर लोगों को निकालने में व्यस्त रहे. ग़ैर-सरकारी संस्थाओं ने बाढ़ पीढ़ितों की साहयता के लिए केंद्र भी बनाए हैं और उन्हें खाने पीने की चीज़े देने की भी कोशिश की जा रही है.

लेकिन मेदियान के रहने वाले इज़हार अली ने बताया कि सरकार केवल बाढ़ पीड़ितों के नाम लिख रही है और उन्हें मदद नहीं मिल रही है.

उन्होंने बीबीसी को बताया, “सरकारी कर्मचारी केवल हमारे नाम लिखते हैं और अभी तक कोई मदद नहीं मिली है. अभी रामज़ान का महीना भी आ रहा है और उसके लिए भी सामान चाहिए.”

उन्होंने कहा कि सड़क बंद होने से यहाँ मरीज़ों को भी मुश्किलें हो रही हैं.उधर प्रांत के दक्षिणें ज़िलों में भारी बारिश के कारण राहत कार्य में मुश्किलें पेश आ रही हैं.

सेना के अनुसार डेरा इस्माईल ख़ान, लकी मरवत और कलाची में कई घर फिर से डूब गए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में माहमारी फैलने के ख़तरा पैदा हो गया है और इससे निपटने की कोशिश की जा रही है.

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