'अमीर ज़मींदारों ने पानी का बहाव मोड़ा'

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Image caption पाकिस्तान में हज़ारों हैक्टेयर उपजाऊ भूमि तबाह हो गई है

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हुसैन हारून ने बीबीसी से बातचीत में आरोप लगाया है कि सबूत हैं कि बाढ़ ग्रस्त पाकिस्तान में अमीर ज़मींदारों ने बांध टूटने दिए ताकि पानी के बहाव को गाँवों और खेतों की ओर मोड़ दिया जाए.

हारून ने इस पूरे मामले की न्यायिक जाँच की माँग की है और आरोप लगाया है कि इन ज़मींदारों ने अपने खेतों और फ़सलों को बचाने के लिए आम गाँववासियों की परवाह नहीं की थी.

ग़ौरतलब है कि जिन लोगों पर ऐसा करने का आरोप लगाया गया है उनमें सरकार के एक मंत्री भी शामिल हैं.

पाकिस्तान में एक महीने से आई बाढ़ के कारण 1.7 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं और 1600 लोग मारे गए हैं.

जब बाढ़ का प्रकोप चरम पर था तो पाकिस्तान का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ के पानी से प्रभावित था और इसमें बड़ा क्षेत्र उपजाऊ भूमि का था जिसमें फ़सलें खड़ी थीं.

अरबों रुपए का नुक़सान

न्ययॉर्क में बीबीसी की संयुक्त राष्ट्र संवाददाता बारबरा प्लेट के अनुसार राजदूत अब्दुल हुसैन हारून सरकार की आलोचना और प्रशासन सेना को सौंपे जाने के सवाल में संक्षिप्त जवाब दिया है.

बारबरा प्लेट के अनुसार पाकिस्तानी राजदूत का कहना था कि पाकिस्तान में जब कोई और रास्ता नहीं बचता तो सेना को ही आख़िरी विकल्प माना जाता है लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थिति अभी वहाँ तक नहीं पहुँची होगी.

बीबीसी के कार्यक्रम हार्ड टॉक में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हुसैन हारून ने कहा, "पिछले कई सालों से ये देखने में आया है कि जब बाढ़ नहीं आती तो जो इलाक़ा बाढ़ के पानी के लिए रखा जाता है उस पर अमीर और शक्तिशाली लोग सिंचाई करने लगते हैं. कुछ इलाक़ों में बांध टूटने दिए गए ताकि पानी दूसरी ओर चला जाए....सरकार को जाँच करानी चाहिए."

पाकिस्तानी राजदूत हारून ने माना कि पाकिस्तान में भ्रष्टाचार की ख़बरें आती रही हैं लेकिन उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के पैसे और उसके ख़र्च का ख़ासा अच्छा निरीक्षण होगा और इस वजह से दान दाताओं को पीछे नहीं हटना चाहिए.

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा था कि देश में बाढ़ के कारण 350 से 500 अरब रुपए की तबाही हुई है.

इस क्षति में मूलभूत ढांचे को नुकसान, पशुओं और फ़सलों को हुआ नुकसान जारी है.

पिछले साल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था 4.1 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी और इस साल उसके 4.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना थी.

लेकिन प्रधानमंत्री गिलानी ने केंद्रीय मंत्रीमंडल की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान के कारण सकल घरेलु उत्पाद की विकास दर महज़ 2.5 प्रतिशत होने की संभावना है.

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