ड्रोन हमले में 12 की मौत

ड्रोन विमान

उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के मीरानशाह में चरमपंथियों को निशाना बनाकर किए गए संदि्ग्ध अमरीकी ड्रोन हमले में कम से कम 12 लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए है्.

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार स्थानीय समय के अनुसार सुबह क़रीबह साढ़े पाँच बजे तीन चालक रहित विमानों (ड्रोन) से दस मिसाइल दाग़े गए.

यह पिछले 24 घंटों में तीसरा ड्रोन हमला है. मंगलवार को हुए दो अलग-अलग ड्रोन हमलों में 15 लोगों की मौत हुई थी. ये हमले शवाल और और क़ुतबख़ेल में हुए थे.

निशाने पर हक़्क़ानी का संगठन

बुधवार को सुबह वज़ीरिस्तान ज़िले के मीरानशाह से तीन किलोमीटर दूर दांडे दरबाख़ेल के दरगाह मंडी में ड्रोन के ज़रिए दस मिलाइल हमले किए गए.

अधिकारियों का कहना है कि अफ़ग़ान क़बायली नेता जलालुद्दीन हक़्क़ानी के दो ठिकानों को निशाना बनाकर ये मिसाइल हमले किए गए.

जलालुद्दीन हक़्क़ानी और उनके बेटे सिराजुद्दीन मिलकर इस इलाक़े में अपनी गतिविधियाँ चलाते हैं.

माना जाता है कि वे अल-क़ायदा और तालिबान से जुड़े हुए हैं और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे इस इलाक़े से अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में चरपमंथी गतिविधियाँ संचालित करते हैं.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार ड्रोन हमलों का नया सिलसिला शुरु होने के बाद तीन सितंबर से अब तक 69 संदिग्ध चरमपंथी मारे गए हैं.

ड्रोन हमलों में जनवरी 2009 से अब तक सात सौ लोग मारे गए हैं.

इस इलाक़े को पाकिस्तानी तालिबान और अल-क़ायदा का गढ़ है और यहाँ अमरीकी ड्रोन हमले होते रहे हैं. इन हमलों की वजह से पाकिस्तान में अमरीका विरोधी भावनाएँ भी पनपी हैं.

पाकिस्तान सार्वजनिक रुप से इस तरह के हमलों का विरोध करता है लेकिन माना जाता है कि पाकिस्तान गोपनीय रुप से इन हमलों का समर्थन करता है.

अमरीकी सेना ने कभी यह स्वीकार नहीं किया कि इस इलाक़े में ड्रोन हमले अमरीका कर रहा है लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि इस इलाक़े में ड्रोन हमले की क्षमता अमरीका के अलावा किसी और के पास है भी नहीं.

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