कश्मीर: पाक संसद में भारत के ख़िलाफ़ प्रस्ताव

कश्मीर में प्रदर्शनकारी

पाकिस्तानी संसद में सोमवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकार हनन की निंदा की गई है.

संसद के ऊपरी सदन या सीनेट में देर रात पारित इस प्रस्ताव में सरकार से अपील की गई है कि वह कश्मीरी लोगों को समर्थन देना जारी रखे.

इस प्रस्ताव को विपक्ष के नेता वसीम सज्जाद ने पेश किया और सत्तारुढ़ दल के नेता नैयर हुसैन बुखारी ने समर्थन दिया.

यह प्रस्ताव ऐसे समय में पारित हुआ है जब दिल्ली से केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भारत प्रशासित कश्मीर में हालात का जायज़ा लेने के लिए पहुँचा हुआ है.

वहाँ तीन महीने से चल रहे हिंसक प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की गोलियों से सौ से अधिक लोगों के मारे जाने के बाद दिल्ली में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद इस प्रतिनिधिमंडल को वहाँ भेजने का निर्णय लिया गया था.

प्रस्ताव

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि कश्मीरी लोगों के आत्म-निर्णय के अधिकार के संघर्ष को पाकिस्तान 'नैतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक' समर्थन देना जारी रखेगा.

इस प्रस्ताव के ज़रिए पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया गया है कि वह भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकार हनन के मामले को संयुक्त राष्ट्र सहित सभी अंतरराष्ट्रीय फ़ोरम में उठाए.

सर्वसम्मति से पारित इस प्रस्ताव में कहा गया है, "यह सदन भारतीय क्रूरता की कड़ी निंदा करता है जिसकी वजह से हाल के दिनों में सौ से अधिक कश्मीरी युवक, पुरुष, महिलाएँ और बच्चे शहीद हुए हैं."

पाकिस्तान की समाचार एजेंसी एपीपी के अनुसार इस प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई है कि वह भारत प्रशासित कश्मीर में चल रही 'क्रूरता' की ओर ध्यान दे और वहाँ चल रहे 'दमन' को रोके.

एजेंसी के अनुसार बाद में सदन के नेता नैयर हुसैन बुखारी ने कहा कि सरकार कश्मीर में भारतीय क्रूरता की निंदा करती है.

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से कहा है कि इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कश्मीर समस्या का हल आवश्यक है.

उनका कहना था कि पाकिस्तान की सरकार और जनता पिछले 63 सालों से कश्मीरियों का समर्थन कर रही है जो भारतीय क्रूरता का सामना कर रहे हैं.

आरोप-प्रत्यारोप

Image caption भारत ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री के बयान को ख़ारिज कर दिया था

कश्मीर पर इस प्रस्ताव से दो दिन पहले ही पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर के मसले पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर हो चुका है.

जिसमें भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि जम्मू कश्मीर के मामले पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के बयान को भारत सिरे से ख़ारिज करता है और इसे भारत के अंदरूनी मामलों में पाकिस्तान का दखल मानता है.

भारत की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के एक बयान के बाद आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को कश्मीर की समस्या का हल संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव और कश्मीरियों की इच्छाओं के अनुरुप तलाश करना चाहिए.

भारत ने पाकिस्तान से कहा था कि कश्मीर पर बयान देने के स्थान पर पाकिस्तान को नियंत्रण रेखा के पार से घुसपैठ के ख़िलाफ़ ठोस और कारगर क़दम उठाने चाहिए और अपने अधिकार क्षेत्र की ज़मीन पर मौजूद आतंकवाद की संरचना को ध्वस्त करना चाहिए.

भारत के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया था कि जम्मू कश्मीर के उन लोगों की कल्याणकारी सहायता में ये पाकिस्तान की ओर से एक महत्त्वपूर्ण योगदान होगा जो नियंत्रण रेखा के पार से चलाए जा रहे आतंकवाद के परिणाम भुगत रहे हैं.

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