'राजनीति में आकर क्या तीर मारेंगे'

मुशर्रफ़

पाकिस्तान के पूर्व फ़ौजी राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ की राजनीतिक पार्टी की औपचारिक रूप से घोषणा पर उनके पुराने साथी और प्रतिद्वंद्वियों ने सतर्क प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है.

जनरल मुशर्रफ़ के काल में उनके दाहिने हाथ समझे जाने वाले अवामी मुस्लिम लीग के प्रमुख शैख़ रशीद अहमद ने कहा है कि पहले भी कई लोगों ने पार्टियाँ बनाई हैं.

उन्होंने कहा, "वह पाकिस्तान के शहरी हैं. अगर वह समझते हैं कि वह अपनी पार्टी बना कर बेहतर ख़िदमत कर सकते हैं तो ये उनका हक़ है."

लेकिन जब उनसे पूछा गया कि अगर परवेज़ मुशर्रफ़ उन्हें अतीत के रिश्ते की बुनियाद पर अपनी पार्टी में शामिल होने की दावत दें तो वे क्या फ़ैसला करेंगे.

शेख़ रशीद का कहना था कि वह अवामी मुस्लिम लीग के प्रमुख हैं और वह उसी में रहना चाहेंगे लेकिन उनकी ख़्वाहिश है कि सारी मुस्लिम लीग एक जुट हों और एक बेहतर नेतृत्व सामने आए ताकि वह देश की सेवा कर सके.

बड़ी रुकावट

उन्होंने कहा, "मुस्लिम लीग के गठबंधन में सबसे बड़ी रुकावट नवाज़ शरीफ़ हैं. देश के राजनीतिक और आर्थिक संकट का कारण सिर्फ़ और सिर्फ़ उनकी ज़िद है वरना अगर मुस्लिम लीगें एकजुट होतीं तो आज हालात बेहतर होते."

मुत्तहिदा क़ौमी मूवमेंट के प्रमुख डॉक्टर फ़ारूक़ सत्तार ने कहा, "कोई पाकिस्तानी अगर कोई राजनीतिक पार्टी बनाता है और लोगों की सेवा की भावना से कर्मभूमि में आ रहा है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन ये काम बहुत मुश्किल है."

उन्होंने कहा, "उनकी (मुशर्रफ़) की जो सलाहियते हैं वह प्रशासक के तौर पर तो टेस्ट हुई हैं... लेकिन यह उनके लिए बिल्कुल नया मोर्चा है जहां उन्हें पहले की तरह प्रशासनिक अधिकार हासिल नहीं हैं, फिर उनका राजनीतिक प्रशिक्षण भी नहीं हुआ है और न वह बुनियादी तौर पर राजनीतिक हैं लेकिन किसी भी समय राजनीति में आने में कोई हर्ज नहीं."

Image caption सूचना सचिव फ़ौज़िया ने कहा हम सभी का स्वागत करते हैं चाहे वह मुशर्रफ़ हों या ज़िया-उल-हक़

पीर पगाड़ा की मुस्लिम लीग फ़ंक्शनल के नेता इम्तियाज़ शेख़ ने कहा, "हम जनरल मुशर्रफ़ का राजनीतिक मैदान में स्वागत करते हैं. वह पाकिस्तान की राजनीति में बिना वर्दी दाख़िल हो रहे हैं और यहां आकर देखे कि उन्हें किस प्रकार की चुनौतियों का सामना है."

क्या तीर मारेंगे...

मुस्लिम लीग (नून) के प्रवक्ता सिद्दीक़ अलफ़ारूक़ ने जनरल मुशर्रफ़ पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, "वह साढ़े आठ साल तक देश के मालिक बने रहे और उनकी ज़बान और क़लम संविधान भी था और क़ानून भी था. उस दौरान उन्होंने पाकिस्तान को जिस तरह बदनाम किया उसके बाद वह राजनीति में आकर क्या तीर मारेंगे."

उन्होंने कहा, "हम तो इसे गंभीरता से नहीं लेते. ये तो बाज़ीच-ए-अतफ़ाल (बच्चों के खेल) वाली बात हुई."

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सूचना सचिव फ़ौज़िया वहाब ने कहा, "पीपुल्स पार्टी एक लोकतांत्रिक पार्टी है और वह चाहती है कि देश में लोकतांत्रिक संस्थान मज़बूत हों और जनतांत्रिक मूल्य फलें फूलें. इसके तहत हम सभी का स्वागत करेंगे चाहे वह मुशर्रफ़ हों या ज़ियाउल हक़, हमें उनसे कोई परेशानी नहीं."

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