'जजों की बहाली की अधिसूचना वापस'

मुख्य न्यायधीश इफ़्तेख़ार चौधरी
Image caption देर रात को जारी किया सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया में आई उन ख़बरों पर अपने आप संज्ञान लिया है जिसमें कहा गया था कि सरकार न्यायधीशों की बहाली की अधिसूचना वापस लेने पर विचार कर रही है.

न्यायपालिका की बहाली की अधिसूचना की ख़बर जब गुरूवार देर रात कुछ टीवी चैनलों पर आई तो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी सहित कई वरिष्ठ न्यायधीश सुप्रीम कोर्ट पहुँचे और इस मामले का नोटिस लिया.

अटॉर्नी जनरल को नोटिस

मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तीय बैठक हुई जिसके बाद अदालत ने इस मामले की सुनवाई करने का निर्णय लिया.

सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी ने इस मामले की सुनवाई के लिए एक 17 सदस्यीय खंडपीठ का गठन किया है जो शुक्रवार को सुनवाई करेगा.

अदालत ने इस संदर्भ में सरकार के अटॉर्नी जनरल को पेश होने का नोटिस जारी कर दिया है.

ग़ौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने नवंबर 2007 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी सहित करीब 64 न्यायधीशों को निलंबित कर दिया था.

इसके बाद न्यायपालिका की बहाली के लिए वकीलों ने देशव्यापी आंदोलन शुरु कर दिया था और 2008 के आम चुनावों के बाद पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने न्यायपालिका की बहाली का वादा किया था.

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने मार्च 2009 में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी सहित सभी न्यायधीशों की उनके पदों पर बहाल कर दिया था.

उधर सरकार ने इस ख़बरों का खंडन किया है जिसमें कहा गया है कि सरकार न्यायधीशों की बहाली की अधिसूचना वापस लेने पर विचार कर रही है.

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री क़मर ज़मान कायरा ने पत्रकारों को बताया कि इस ख़बर में कोई सच्चाई नहीं है और न्यायपालिका और सरकार को लड़ाने की साज़िश हो रही है. उन्होंने कहा कि पीपुल्स पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार न्यायपालिका का सम्मान करती है.

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