पाकिस्तानी फ़िदायीन की कहानी

फ़िदायीन
Image caption अब्दुस सलाम अब पढ़ लिखकर फ़ौज में भर्ती होना चाहते हैं

ब्दुस सलाम से कहा गया था कि अगर वो ख़ुद को बम से उड़ा लेते हैं तो उन्हें जन्नत नसीब होगा. उसने इस्लामी चरमपंथियों का यक़ीन किया और आत्मघाती हमलावर बनने के लिए प्रशिक्षण लिया. लेकिन उनका अब ह्दय परिवर्तन हो गया है.

अब्दुस सलाम अब 14 साल के हैं, उन्होंने बीबीसी को बताया कि वो कैसे मौत के मुँह से बाल बाल बचे. अब्दुस सलाम की कहानी उन्हीं की ज़ुबानी.

देखें - अब्दुस सलाम के साथ बातचीत

ज़हीर, शेर रहमान और ज़ैनुल्लाह उम्र में मुझसे बड़े हैं. वे सभी तालिबान लड़ाके हैं. दरअसल, ज़हीर और रऊफ़ अफ़गानिस्तान के हैं और उन्होंने वहाँ की लड़ाई में भी हिस्सा लिया था.

मेरे पाँच भाई हैं. मेरे सबसे बडे़ भाई मेरे पिता के व्यापार में मदद करते हैं.

वे निर्माण के काम में आनेवाली मशीनों को किराये पर देते हैं.

मेरा परिवार पिछले 30 वर्षों से कराची के सोहराब गोथ इलाक़े में रहता है.

मैं ज़हीर की दुकान पर जाया करता था, जहाँ हम जिहाद, फ़िदायीन हमलों के बारे में बातें करते थे.

एक दिन ज़हीर मुझे एक तरफ़ ले गया और कहने लगा कि वो एक फ़िदायीन बनने जा रहा है.

जब मैंने उससे सवाल किया कि वो ऐसा क्यों करना चाहता है, तो उसने जवाब दिया, ''मैं वाक़ई फ़िदायीन बनना चाहता हूँ, कम से कम उससे मुझे जन्नत तो नसीब होगी.''

मैंने पूछा कि यह कैसे संभव है, तो उसने जवाब दिया कि जब क़यामत के दिन ये पूछा जाएगा कि तुमने दुनिया में अल्लाह के लिए क्या किया तो मैं कहूँगा कि कुछ भी नहीं तो मुझे दोज़ख़ में भेज दिया जाएगा.

जिहाद और जन्नत

लेकिन अगर मैंने फ़िदायीन हमले में हिस्सा लिया है तो मैं ये कह पाऊँगा कि मैंने ख़ुदा की राह में अपना जिस्म क़ुरबान कर दिया.

उसके बाद मेरी मुलाक़ात शेर रहमान से करवाई गई लेकिन मैंने जब उससे कहा कि मैं अफ़ग़ानिस्तान जाकर फ़िदायीन हमलों में शामिल होना चाहता हूँ, अमरीकियों पर आत्मघाती हमले करना चाहता हूँ तो उसने मना कर दिया.

शेर रहमान का कहना था कि चूंकि मेरी दाढ़ी नहीं है इसीलिए मैं अफ़ग़ानिस्तान नहीं जा सकता लेकिन वज़ीरिस्तान के तालिबान से उसकी अच्छी जान पहचान है.

उसने कहा, ''हमले चाहे अफ़गानिस्तान में हों या पाकिस्तान में तुम्हें जन्नत में जगह मिलेगी. तुम ये काम कराची में ही करो.''

शेर रहमान ने मुझे धमकी दी कि मैंने इस बातचीत का ज़िक्र अगर किसी से किया तो वह मेरा सर कलम कर देगा. मैं इस धमकी से बहुत दहशत में था.

कुछ दिनों बाद मेरी भेंट जै़नुल्लाह से करवाई गई.

उन्होंने कहा कि आत्मघाती हमलावर बनने के लिए मैं बहुत छोटा हूँ और मुझे फ़िदायीनों के हमले में इस्तेमाल होने वाले जैकेट बनाने का काम दिया जाएगा.

फ़िदायीन

जै़नुल्लाह का कहना था कि फ़िदायीन के नेक काम का सवाब मुझे भी हासिल होगा.

इसी दौरान ज़हीर लड़ाई में शामिल होकर अफ़गानिस्तान से वापस आया था और वह मुझे जिहाद की दिलचस्प कहानियाँ सुनाया करता था.

बाद में, शेर रहमान और जै़नुल्लाह दोनों गिरफ़्तार हो गए.

मुझे कभी नहीं बताया कि हमला कहाँ करना है लेकिन मुझसे हाल में कहा गया था कि मैं इसके लिए तैयार रहूँ, ये कभी भी हो सकता है.

उस दौरान मैं सोते जागते बस फ़िदायीन और जन्नत की बातें सोचा करता था.

मेरे पिता को मधुमेह की बीमारी है, जब से उन्हें इस बात का पता चला है वो रात को सो नहीं पाते हैं.

अल्लाह ने मुझे एक नई ज़िंदगी दी है. मैं अपना ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित करना चाहता हूँ और चाहता हूँ कि मैं पाकिस्तान की फ़ौज में भर्ती होऊं.

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