शरीर दफ़न पर जात नहीं

Image caption पाकिस्तान में अहमदी समुदाय के लोगों को हाल में निशाना बनाया गया था

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक गाँव में लोगों के विरोध प्रदर्शन के बाद अहमदी समुदाय के एक व्यक्ति के शव को क़ब्र से निकाल कर दूसरे क़ब्रिस्तान में दफ़न कर दिया गया.

यह घटना ज़िला सरगोधा के तालुक़ा भलवाल के गाँव चक 24 में घटी.

पाकिस्तान अहमदिया संगठन के प्रवक्ता सलीमुद्दीन ने बीबीसी को बताया कि 45 वर्षीय शहज़ाद वड़ाइच के शव को गाँव के क़ब्रिस्तान में दफ़न किया गया था.

उन्होंने कहा, ''कुछ मौलवियों के कहने पर गाँव वालों ने शहज़ाद का शव दफ़नाने का विरोध किया जिस पर पुलिस ने शहज़ाद के परिवार को शव निकालने का आदेश किया.''

सलीमुद्दीन के अनुसार पुलिस के आदेश पर उनके शव को क़ब्र से निकाला गया और दूसरे क़ब्रिस्तान में दफ़न कर दिया गया.

उन्होंने बताया कि शहज़ाद अहमदी नहीं थे लेकिन उनके भाई और परिवार के दूसरे सदस्य अहमदी हैं.

ग़ौरतलब है कि अहमदी समुदाय का मानना है कि वे मुसलमान हैं लेकिन पाकिस्तान के संविधान के अनुसार अहमदी मुसलमान नहीं है.

सरगोधा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जावेद इस्लाम ने बीबीसी को बताया, ''असल बात यह है कि शहज़ाद वड़ाइच को मुसलमानों के क़ब्रिस्तान में दफ़न किया गया था जो क़ानून का उल्लंघन है. उस पर कुछ लोगों ने आपत्ति व्यक्त की जिस पुलिस ने शव को क़ब्रिस्तान से निकलवा कर दूसरे क़ब्रिस्तान में दफ़न करवा दिया.''

उन्होंने बताया कि इस समस्या का सर्वसम्मति से समाधान हो गया.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि गाँव वालों की शिकायत पर पुलिस ने शव को दूसरे क़ब्रिस्तान में दफ़ना दिया.

जावेद इस्लाम ने बताया, ''एक धार्मिक गुट ख़तमे नबूवत ने इस पर आपत्ति जताई थी और यह सही भी है कि मुसलमानों के क़ब्रिस्तान में एक अहमदी कैसे दफ़न हो सकता है.''

उनने कहा कि जिस तरह मुसलमानों के क़ब्रिस्तान में ईसाई दफ़न नहीं हो सकता इस तरह एक अहमदी भी मुसलमानों के क़ब्रिस्तान में दफ़न नहीं हो सकता.

पाकिस्तान अहमदी संगठन के अनुसार अहमदी समुदाय के शवों के क़ब्र से निकालने की ये 30वीं घटना है.

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