स्थाई सदस्यता पर पाक ने 'आपत्ति' जताई

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय
Image caption पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि अमरीका इस मामले पर नैतिक फ़ैसला लेगा और अस्थाई मक़सदों को हावी नहीं होने देगा

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारतीय संसद में सांसदों को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता के प्रयासों का समर्थन किया है. लेकिन पाकिस्तान ने आधिकारिक बयान के ज़रिए इस पर आपत्ति जताई है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, "ये अनुमोदन संयुक्त राष्ट्र की सुधार प्रक्रिया को और जटिल बनाता है. ऐसा सुधार जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिंद्धांतों और संप्रभुता में बराबरी के सिद्धांत का उल्लंघन करता हो....सामूहिक सुरक्षा का उल्लंघन करता हो उससे अंतरराष्ट्रीय संबंधो को आघात पहुँचेगा.'

पाकिस्तान ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधारों का ये रास्ता विश्वास योग्य नहीं है. पाकिस्तान ने 'भारत की अपने पड़ोसियों के साथ कारगुज़ारी और जम्मू-कश्मीर पर सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के कथित उल्लंघन' को मुख्य तौर पर अपनी आपत्तियाँ बताया है.

पाकिस्तानसे टीकाकार अनीस जिलानीने बीबीसी को बताया है कि सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता पर भारत को मिले समर्थन से 'पाकिस्तान में ख़ासी नाराज़गी होगी और भारत के लिए ये राह इतनी आसान नहीं होगी....'

उधर पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने दिल्ली में हुए ओबामा-मनमोहन संवाददाता सम्मेलन के बाद कहा है कि पाकिस्तान भारत के साथ मिलकर चलने को तैयार है ताकि साझा तौर पर आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ा जा सके.

क़ुरैशी ने भारतीय टीवी चैनल सीएनएन-आईबीएन के साथ बातचीत में कहा, "समय की मांग है कि दोनों देशों के बीच समग्र वार्ता हो. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और विदेश मंत्री एसएम कृष्णा की मंशा अच्छी है. पाकिस्तान हमेशा भारत-पाक रिश्तों को सामान्य करने का हामी रहा है. जैसे कि राष्ट्रपति ओबामा ने कहा भारत की आर्थिक प्रगति के लिए सामान्य स्थिति ज़रूरी है...."

इससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री ने अमरीकी राष्ट्रपति की मौजूदगी में कहा था, "मेरा आग्रह है कि आप एक साथ बातचीत और आतंकवाद की मशीन को सक्रिय नहीं रख सकते. एक बार पाकिस्तान आतंकवाद से प्रेरित धमकियों से दूर हो जाए तो भारत ख़ुशी से सार्थक बातचीत करने के लिए तैयार है."

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