सीआईए से मुआवज़ा माँगा

चालक रहित विमान यानी ड्रोन

एक पाकिस्तानी क़बीलाई व्यक्ति ड्रोन हमले में अपने बेटे और भाई की मौत की मौत के लिए ज़िम्मेदार ठहराते हुए अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए पर 50 करोड़ डॉलर के मुआवज़े का मुक़दमा करने जा रहा है.

उत्तरी वज़ीरिस्तान के करीम ख़ान का कहना है कि उनके वकील ने इस्लामाबाद स्थित अमरीकी दूतावास को एक क़ानूनी नोटिस भेजा है.

इस ग्रामीण का कहना है कि 19 दिसंबर, 2009 को जब उनके घर पर मिसाइल से हमला किया गया उस वक़्त उनके घर में कोई चरमपंथी नहीं था.

शायद यह पहली बार ही है जब किसी पाकिस्तानी नागरिक ने अमरीका से मुआवज़े की माँग की है.

पाकिस्तान के इस क़बीलाई इलाक़े पर वर्ष 2008 से ही अमरीकी ड्रोन हमले हो रहे हैं.

इन हमलों में अब तक सैकड़ों चरनपंथी और आम नागरिक मारे गए हैं.

अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर स्थित इन इलाक़ों को तालिबान और अलक़ायदा का गढ़ माना जाता है.

न्याय नहीं मिला

क़रीम ख़ान उत्तरी वज़ीरिस्तान के मुख्य शहर मीर अली के नज़दीक के गाँव माची ख़ेल के रहने वाले हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "मेरे घर पर हुए ड्रोन हमले में मेरा बेटा और भाई मारे गए थे."

उन्होंने कहा, "वे दोनों सामान्य नागरिक थे और स्थानीय सरकारी प्रशासन के लिए काम करते थे. एक और आदमी जो मेरे घर पर काम करता था, वह भी मेरे घर पर हुए अमरीकी ड्रोन हमले में मारा गया."

एक स्वतंत्र पत्रकार की तरह काम करने वाले करीम ख़ान का कहना है कि जब उनके घर पर हमला हुआ उस वक़्त वहाँ न कोई विदेशी था न ही कोई चरमपंथी.

वे कहते हैं, "मैं पिछले एक साल से स्थानीय प्रशासन और सरकार के दरवाज़े खटखटा रहा हूँ लेकिन मुझे न्याय नहीं मिला."

उनका कहना है, "इसलिए मैंने तय किया कि अब क़ानूनी रास्ता अख़्तियार किया जाए."

करीम ख़ान का कहना है कि उनके वकील ने अमरीकी रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स, सीआईए के निदेशक लिओन पैनेटा और उसके इस्लामाबाद प्रमुख जोनाथन बैंक्स को नोटिस भेजा है.

उनका कहना है कि अगर 14 दिनों के भीतर उन्हें जवाब नहीं मिला तो वे इन लोगों के ख़िलाफ़ इस्लामाबाद की अदालत में मुक़दमा दायर कर देंगे.

हालांकि अमरीका ड्रोन हमलों पर कोई टिप्पणी नहीं करता लेकिन वह अधिकारिक रुप से मानता है कि ड्रोन हमले अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान की सीमा पर चल रहे आतंक के ख़िलाफ़ युद्ध का हिस्सा हैं.

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