पाक अख़बारों में भारत विरोधी झूठी ख़बरें

पाकिस्तान के अख़बार
Image caption इस बात की जांच की जा रही है कि इन खबरों का स्रोत क्या था और अख़बारों को ये जानकारी कहां से मिली.

गोपनीय जानकारियां जारी करने वाली वेबसाइट विकीलीक्स की आड़ में भारत विरोधी झूठी खबरें छापने को लेकर पाकिस्तान के कुछ जानेमाने अख़बारों ने अफ़सोस ज़ाहिर किया है.

पाकिस्तान के इन अख़बारों ने विकीलीक्स का हवाला देकर भारत विरोधी ऐसी ख़बरें छापी थीं जिनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था. खबरों में दावा किया गया था कि विकीलीक्स के कूटनीतिक दस्तावेज़ों में अमरीकी अधिकारियों ने कई भारत विरोधी बातें कही हैं.

खबरों के अनुसार अमरीका के कूटनीतिज्ञों ने भारत के कुछ वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों को 'निकम्मा और जन-संहारक' करार दिया था. ख़बरों में ये भी दावा किया गया था कि भारत गुप्त रुप से पाकिस्तान में चरमपंथियों की सहायता कर रहा है.

खंडन

विकीलीक्स के नकली दस्तावेज़ों की ये रिपोर्ट समाचार एजेंसी 'ऑनलाइन' की ओर से भेजी गई थी.

'द न्यूज़' और जंग जैसे अख़बारों ने इस विश्वास के साथ ये खबर प्रकाशित की थी कि रिपोर्ट सही है. हालांकि ख़बरें प्रकाशित करने से पहले उन्हें इसकी जाँच करनी चाहिए थी.

उधर समाचार एजेंसी ऑनलाईन के प्रमुख मोहसिन बेग ने बीबीसी से बात करते हुए विकीलीक्स के दस्तावेज़ों की पुष्टि की है और उन समाचार पत्रों की आलोचना की है जिन्होंने इस ख़बर पर माफ़ी माँगी है.

उन्होंने कहा, “जिन अख़बारों ने इस ख़बर पर माफी माँगी है उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था, अगर विकीलीक्स खुद हमारी ख़बर का खंडन करती है तब ये माफ़ी उचित है. विकीलीक्स की इस ख़बर के इंटरनेट पर कई लिंक्स मौजूद हैं.”

मोहसिन बेग ने बताया कि ब्रिटेन के अख़बार 'गार्डियन' के पास विकीलीक्स के दस्तावेज़ों को प्रकाशित करने का कोई अधिकार नहीं है. ये दस्तावेज़ इंटरनेट पर मौजूद हैं और कोई भी इन्हें प्रकाशित कर सकता है.

जांच

इस बीच पाकिस्तान में अंग्रेज़ी भाषा के अख़बार 'इंटरनेशनल हेराल्ड ट्रिब्यून' से संबंधित अख़बार 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' ने इस ख़बर को वापस लेते हुए मुखपृष्ठ पर एक खंडन छापा है.

अख़बार ने लिखा, ''हमें खेद है कि हमने बिना स्रोत जांचे और तथ्यों को परखे ये खबर छापी. हमें इस खबर के छपने से हुई असुविधा के लिए खेद है.''

एक अन्य समाचार पत्र 'द न्यूज़' ने लिखा, ''इस ख़बर के बारे में जांच के बाद हमें अपने सूत्रों से पता चला कि ये ख़बर गलत थी और कुछ लोगों से प्रेरित थी.''

दूसरी ओर ब्रिटेन के अख़बार 'गार्डियन' ने भी विकीलीक्स के उन दस्तावेज़ों को नकली क़रार दिया है जिनमें भारत को निशाना बनाया गया था.

'गार्डियन' ने अपनी ख़बर में लिखा है कि उसने विकीलीक्स के सभी दस्तावेज़ों की विस्तृत जांच की है और उसे ऐसा कोई दस्तावेज़ नहीं मिला है.

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