विस्थापित हो रहे हैं हिंदू

पाकिस्तान के  हिंदू

मानवाधिकार मंत्रालय का कहना है कि बलूचिस्तान के हिंदू सुरक्षा कारणों से विस्थापित हो रहे है और बहुत से भारत जा चुके हैं.

मानवाधिकार मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सईद अहमद ख़ान ने बीबीसी को बताया, “बलूचिस्तान के हिंदू अधिकतर व्यापार के जुड़े हैं जो देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “कुछ समय से प्रांत में हिंदू के अपहरण की घटनाएँ शुरु हो गई हैं जिसकी वजह से एक साल के दौरान प्रांत के विभिन्न इलाक़ों से क़रीब 27 परिवार मजबूरी की हालत में भारत जा चुके हैं.”

सईद अहमद ख़ान के अनुसार केंद्रीय और प्रांतीय सरकारें हिंदू समुदाय को सुरक्षा प्रदान करने के उपाय कर रही हैं.

दूसरी ओर क्वेटा शहर में हिंदू समुदाय ने बढ़ती हुई अपहरण की घटनाओं के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया और धार्मिक नेता हुसैन लाखमीर की रिहाई की माँग की.

ग़ौरतलब है कि कुछ दिन पहले हिंदूओं के धार्मिक नेता हुसैन लखमीर और प्रांतीय सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी नानक राम का अपहरण हो गया था.

स्थानीय पुलिस ने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया है लेकिन अभी दोनों के बारे में कुछ पता नहीं चल सका है.

क़लात शहर से अग़वा किए गए विनोद कुमार की भी रिहाई अभी तक नहीं हुई है जिनको करीब 15 दिन पहले अग़वा किया गया था.

डर का माहौल

धार्मिक नेता हुसैन लखमीर के एक रिश्तेदार गोरबख़्श लाल ने बताया, “लखमीर महाराज के अपहरण की वजह से न केवल उनका परिवार डर महसूस कर रहा है बल्कि हिंदू समुदाय भी परेशान है.”

उन्होंने कहा कि महाराज हुसैन लखमीर की रिहाई के लिए सरकार से अनुरोध किया गया है लेकिन अभी तक कोई परिणाम नहीं निकला है.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान में सिंध प्रांत के बाद बलूचिस्तान में सब से ज़्यादा हिंदू रहते हैं जिनमें से अधिकतर व्यापारी हैं लेकिन कुछ सरकारी नौकरियाँ भी कर रहे हैं.

पिछले कुछ महीनों से फ़रौती के लिए हिंदूओं के अपहरण की घटनाएँ बढ़ गई हैं और कई लोग देश छोड़ कर भारत और अरब देशों की ओर जा चुके हैं.

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