पाक ने तेल की क़ीमतें घटाईं

गीलानी

पाकिस्तान की सरकार ने पिछले दिनों तेल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी की थी, लेकिन अब उसने ये बढ़ोत्तरी वापस ले ली है. जानकारों का कहना है कि संसद में बहुमत गँवाने के बाद सरकार ने ये राहत दी है.

पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गीलानी को चेतावनी दी थी कि या तो वे क़ीमतों में बढ़ोत्तरी का फ़ैसला वापस ले अन्यथा विश्वास मत का सामना करें.

रविवार को अल्ताफ़ हुसैन की मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था और कहा था कि पेट्रोल और किरासन तेल की क़ीमतों में नौ प्रतिशत की हुई बढ़ोत्तरी बर्दाश्त से बाहर है.

बीबीसी संवाददाताओं का मानना है कि इस फ़ैसले के बाद एमक्यूएम दोबारा गठबंधन में शामिल हो सकता है.

दबाव

प्रधानमंत्री गीलानी पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) की ओर से कड़ी आर्थिक नीतियों को लागू करने का दबाव है. आईएमएफ़ ने कहा है कि वो कर्ज़ की अगली किश्त तभी जारी करेगा, जब पाकिस्तान जनरल सेल्स टैक्स में भी सुधार करे.

इसके अलावा बाढ़ के कारण भी 10 अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है.

गुरुवार को नेशनल असेंबली में प्रधानमंत्री ने कहा कि तेल की क़ीमतें 31 दिसंबर के स्तर पर ही रहेंगी.

उन्होंने कहा, "सभी राजनीतिक दलों के नेता इस पर सहमत हैं कि तेल की क़ीमतें घटनी चाहिए. यह बहुत कठिन काम था. बहुत ही असंभव. लेकिन आपसे सलाह करने और सहमति के बाद ये संभव हो पाया है."

इस सप्ताह प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गीलानी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के बीच हुई बैठक में क़ीमतों में बढ़ोत्तरी को वापस लिया जाना एक प्रमुख मांग थी.

बैठक में नवाज़ शरीफ़ ने भी ये भी मांग की थी कि सरकारी ख़र्च में 30 फ़ीसदी की कटौती की जाए और भ्रष्टाचार मामलों में पीपीपी अधिकारियों के ख़िलाफ़ आए अदालतों के फ़ैसलों को लागू किया जाए.

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