मुमताज़ क़ादरी: अंगरक्षक और हत्यारा

मुमताज़ क़ादरी

क़ादरी की 'ट्रिगर हैप्पी' जवान की छवि थी

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या कर मुमताज़ क़ादरी कई पाकिस्तानियों के लिए हीरो बन गए हैं. हालाँकि क़ादरी को गवर्नर की सुरक्षा का ज़िम्मा सौंपा गया था.

मुमताज़ क़ादरी का कहना है कि देश के ईशनिंदा क़ानून में प्रस्तावित संशोधन को गवर्नर के समर्थन से वह ग़ुस्से में था.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क़ादरी ने 4 जनवरी के हत्याकांड से पाँच दिन पहले ही किसी की जान लेने का मन बना लिया था. उसने ये फ़ैसला किया था रावलपिंडी में एक मौलवी की धार्मिक सभा में.

गवर्नर तासीर की बदक़िस्मती थी कि वे क़ादरी के लिए सबसे आसान निशाना साबित हुए.

लेकिन मनोविश्लेषकों की मानें तो पूरी कहानी सप्ताह भर की ही नहीं है.

सिर्फ़ हाई स्कूल की पढ़ाई करने के बाद क़ादरी पुलिस कमांडो में शामिल हो गया था. इसके कुछ ही दिन बाद उसे संयुक्तराष्ट्र के एक दल की सुरक्षा में तैनात किया गया.

एक बार संयुक्तराष्ट्र के दल के कुछ लोग एक टैक्सी को आवाज़ दे रहे थे, लेकिन टैक्सी नहीं रुकी. इस पर क़ादरी को ग़ुस्सा आ गया और उसने अपनी सरकारी बंदूक से गोलियाँ दागनी शुरू कर दी.

संयोग से उस वाक़ये में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन अधिकारियों की नज़र में क़ादरी की छवि एक ऐसे सिपाही की बन गई जो कि गोलियाँ दागने के लिए तैयार बैठा रहता है.

लाहौर के राजकीय महाविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. ज़ाहिद महमूद कहते हैं, “ऐसे लोग अपनी भावनाओं और विश्वास को सबसे ज़्यादा महत्व देते हैं, और उन्हें कभी पछतावा नहीं होता है.”

पुलिस पूछताछ के वीडियो में क़ादरी एक सवाल के जवाब में कहता है, “सलमान तासीर के साथ वही हुआ जो कि पैगंबर का अपमान करने वाले के साथ होना चाहिए.”

सुरक्षा के लिए ख़तरा

क़ादरी के भाई दिलपाज़ीर आवाँ उसे एक सौम्य, जोशीला और आज्ञाकारी व्यक्ति बताते हैं, जो कि पाँच वक़्त का नमाज़ी है.

संवेदनशील तैनातियों के लिए जवानों के चयन में मनोवैज्ञानिक विश्लेषण की ज़रूरी भूमिका है. इसके ज़रिए जवानों की मनोदशा का अनुमान लगाया जा सकता है.

चौधरी याक़ूब

आवाँ ने बीबीसी को बताया, “क़ादरी भाइयों में सबसे छोटा भले ही हो, लेकिन वह हम सब से ज़्यादा धार्मिक प्रवृति का है.”

लेकिन मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों का कुछ और ही मानना है.

इस्लामाबाद में पुलिस अभियानों के प्रमुख बिन यामीन कहते हैं, “ये कहना ग़लत है कि वह बहुत ज़्यादा धार्मिक स्वभाव वाला व्यक्ति है.”

“उसका इतिहास उसे दुनियादारी वाला व्यक्ति साबित करता है. ऐसा व्यक्ति जो कभी दाढ़ी बढ़ा लेता है, कभी सफ़ाचट हो जाता है, फिर कभी लंबे बाल बढ़ा लेता है. वह अक्सर किसी नई औरत से इश्क़ कर बैठता है.”

यामीन आगे कहते हैं, “यदि क़ादरी को पैगंबर के अपमान की इतनी ही चिंता होती तो वह बहुत पहले किसी की हत्या कर चुका होता, क्योंकि उसकी ड्यूटी अक्सर ईशनिंदा के आरोप में हिरासत में लिए गए लोगों को जेल से अदालत लाने ले जाने की रहती थी.”

बिन यामीन ने स्वीकार किया कि क़ादरी उन 11 कमांडो की सूची में शामिल था जिन्हें कि सुरक्षा के लिए ख़तरा घोषित किया गया था.

उन्होंने कहा, “हमने संबंधित अधिकारियों को जवाबतलब किया है कि क़ादरी को गवर्नर तासीर की सुरक्षा ड्यूटी में क्यों लगाया गया.”

कई विश्लेषकों का मानना है कि संवेदनशील मामलों में पुलिस जवानों की मनोवैज्ञानिक पड़ताल की जानी चाहिए, भले ही ये तरीक़ा शतप्रतिशत कारगर नहीं हो.

पाकिस्तान की राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के प्रमुख चौधरी याक़ूब कहते हैं, “संवेदनशील तैनातियों के लिए जवानों के चयन में मनोवैज्ञानिक विश्लेषण की ज़रूरी भूमिका है. इसके ज़रिए जवानों की मनोदशा का अनुमान लगाया जा सकता है.”

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