स्कूलों पर हमलों में बढ़ोतरी

पाक स्कूल
Image caption पाकिस्तान में 2007 के बाद स्कूलों पर हमलों में बढ़ोतरी हुई है.

पाकिस्तान के क़बायली इलाक़ों और ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के अन्य इलाक़ों के बाद अब प्रांतीय राजधानी में भी स्कूलों पर हमलों में बढ़ोतरी हुई है.

पेशावर में पिछले दो महीनों के भीतर स्कूलों के सामने और स्कूल बसों के पास धमाकों में दो शिक्षकों की मौत हो गई और कई छात्र घायल हुए.

इसी तरह पिछले साल 20 स्कूलों को निशाना बनाया गया.

पेशावर के इलाक़े भाना माड़ी में 13 दिसंबर 2010 को एक स्कूल बस के पास धमाका हुआ जिसमें दो छात्र गंभीर रुप से घायल हो गए थे. हसन गढ़ी के इलाक़े में 12 जनवरी 2011 को स्कूल बस के पास धमाका किया गया जिस में दो शिक्षकों की मौत हो गई थी और दो छात्र घायल हो गए थे.

पेशावर के नोथिया इलाक़े में 19 जनवरी 2011 को स्कूल के सामने धमाका हुआ जिस में एक बच्चे की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए.

हमलों पर चिंता

शहर में ताज़ा हमलों पर चिंता व्यक्त की जा रही है क्योंकि पहली बार स्कूलों को उस समय निशाना बनाया जा रहा है जब वह खुले होते हैं.

पेशावर के पुलिस प्रमुख लियाक़त अली ने बीबीसी को बताया कि अब बड़े हमले रुक गए हैं और चरमपंथी कमज़ोर हुए हैं लेकिन आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध अभी जारी है.

उन्होंने कहा कि ताज़ा चरमपंथी कार्रवाईयों से पता चलता है कि चरमपंथी कमज़ोर हुए हैं इसलिए उन्होंने स्कूलों को निशाना बनाना शुरु कर दिया है.

पाकिस्तान के क़बायली इलाक़ों और ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत में स्कूलों पर हमलों में 2007 के बाद बढ़ोतरी हुई है. केवल स्वात में अब तक 200 स्कूलों की इमारतों को तबाह किया गया है.

Image caption पेशावर में 19 जनवरी को एक स्कूल के सामने धमाका किया गया जिस में छह छात्र घायल हो गए.

इस के साथ ही मोहमंद एजेंसी, ख़ैबर एजेंसी, बाजौड़ एजेंसी और दर्रा आदम ख़ेल में भी 300 के करीब स्कूलों को तबाह किया गया है.

नई रणनीति

बाचा ख़ान ट्रस्ट एजुकेशन फ़ाऊँडेशन के प्रमुख ख़ादिम हुसैन ने बीबीसी को बताया कि हमलों का उद्देश्य युवा पीढ़ी को शिक्षा से दूर रखना है और यह चरमपंथियों की नई रणनीति है.

उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से चरमपंथियों ने संकेत दिया है वह अभी भी मौजूद हैं और कुछ भी कर सकते हैं.

ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में केवल स्कूलों को ही तबाह नहीं किया जा रहा है बल्कि अध्यापकों को भी निशाना बनाया जा रहा है.

इस्लामिया कॉलेज विश्वविद्यालय के कुलपति अजमल ख़ान पिछले चार महीनों से अग़वा हैं. इस से पहले डेरा इस्माईल ख़ान में दो अध्यापकों की हत्या कर दी गई थी.

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