अफ़ग़ानिस्तान:पच्चीस से ज़्यादा पाकिस्तानी अमरीकी क़ैद में

अमरीकियों की क़ैद में पाकिस्तानी नागरिक
Image caption पाकिस्तान सरकार इन क़ैदियों को छुड़ाने के लिए हर संभव प्रयास करने का दावा तो करती है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है.

अफ़ग़ानिस्तान पर अमरीका के 11 सितंबर के हमलों के बाद सैकड़ों की संख्या में पाकिस्तानी नागरिकों को अल-क़ायदा और तालिबान से संबंध के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.

उनमें से कई लोगों को बेक़सूर क़रार देकर जेल से रिहा कर दिया गया था. लेकिन अभी भी कई पाकिस्तानी नागरिक अमरीकी और अफ़ग़ान जेलों में बेग़ैर किसी अदालती कार्रवाई के बंद है और बाहर निकलने का इंतज़ार कर रहे हैं.

अब अमरीकी फ़ौज ने पहली बार ये क़बूल किया है कि उसके क़ब्ज़े में 25 से ज़्यादा पाकिस्तानी नागरिक है. हालाकि जेल में बंद क़ैदियों की पहचान बताने से इन्कार कर दिया है.

इससे पहले तो अमरीकी फ़ौज ये भी नहीं बताती थी कि उनके क़ब्ज़े में रहने वालों की संख्या कितनी है और उनकी नागरिकता क्या है.

जेलों में पाकिस्तानी

इधर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बगराम के अलावा अफ़ग़ान जेलों में इस समय कम से कम 265 पाकिस्तानी क़ैद हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने बीबीसी ऊर्दू को दिए गए एक इंटरव्यू में अमरीकी हिरासत में 20 पाकिस्तानी नागरिकों के रहने की बात स्वीकार की थी.

काबुल में अमरीकी सना के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि ''अफ़ग़ानिस्तान में काफ़ी कम संख्या यानि 50 से भी कम किसी तीसरे देश के नागरिक हैं. इनमें आधे से कुछ ज़्यादा पाकिस्तानी हैं. ख़ुफ़िया जानकारी को बरक़रार रखने और अमरीकी सैनिकों, अफ़ग़ान जनता और जेल में बंद क़ैदियों की सुरक्षा के कारण हम पाकिस्तानी नागरिकों के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दे सकते.''

रिहाई की कोशिश

अब्दुल बासित का कहना था कि पिछले चार महिनों में उन्होंने 94 पाकिस्तानी क़ैदियों को छुड़वाया है. लेकिन अमरीकी सेना की क़ैद में रह रहे पाकिस्तानियों की रिहाई के बारे में उन्होंने कोई समय सीमा देने से इंकार कर दिया लेकिन विश्वास जताया कि वो भी जल्द रिहा कर दिए जाएगें.

उनका कहना था कि '' हमारा दूतावास बगराम के अधिकारियों से संपर्क में है. हम द्विपक्षीय बातचीत में भी ये मुद्दा उठाते रहते हैं. लेकिन अंतिम फ़ैसला वाशिंगटन में ही होना है.''

दूसरी तरफ़ आंतरिक मामलों के मंत्री रहमान मलिक का कहना है कि बगराम में अब कोई पाकिस्तानी क़ैदी नहीं है.

बीबीसी ऊर्दू के ज़फ़र मलिक से बातचीत के दौरान रहमान मलिक ने कहा कि जब पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच हुई संधि को अमल में लाया जाएगा तो ये पाकिस्तानी क़ैदी ख़ुद ब ख़ुद पाकिस्तान भेज दिए जाएगें.

अमरीकियों के अलावा अफ़ग़ानिस्तान में क़ैद लगभग 265 पाकिस्तानियों में से 121 को अदालत ने सज़ा सुनाई है. इनमें से अधिकतर तालिबान या अल़-क़ायदा से संबंध रखने के आरोप में गिरफ़्तार हैं.

लेकिन ज़्यादा चिंता की बात ये है कि उन पाकिस्तानियों के बारे में कोई जानकारी नही है जो अमरीकियों, अफ़ग़ान अधिकारियों या फिर अफ़ग़ान क़बायली सरदारों की निजी जेलों में बंद हैं और उनकी बात कोई नहीं करता .

पाकिस्तानी अधिकारी और मानवाधिकार कार्यकर्ता ऐसे क़ैदियों की मौजूदगी की पुष्टि तो करते हैं लेकिन उनकी संख्या के बारे में कुछ नहीं कहते.

लापता पाकिस्तानियों के लिए अभियान चलाने वाली मानवाधिकार कार्यकर्ता आमिना मसूद ने पिछले दिनों काबुल में पाकिस्तानी राजदूत के नाम एक चिट्ठी में ये आरोप लगाया है कि कुछ जानकारियों के मुताबिक़ अमरीकी अधिकारी अपनी क़ैद में रहे रहे पाकिस्तानियों को रिहा करना चाहते हैं लेकिन पाकिस्तानी अधिकारी उन्हें अपनी हिरासत में लेने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं.

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