'ईश निंदा में क़ैद किशोर को छोड़ा जाए'

ईश निंदा क़ानून

पाकिस्तान का एक वर्ग ईश निंदा क़ानून के विरोध में है

मानवधिकार के क्षेत्र में काम करनेवाली संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि वो विवादित ईश निंदा कानून के तहत सज़ा काट रहे किशोर को जेल से रिहा करे.

सत्रह साल के मोहम्मद समीउल्लाह दक्षिण के शहर कराची में क़ैद हैं.

उन पर आरोप है कि उसने एक इम्तिहान के दौरान पैग़म्बर मोहम्मद पर अभद्र टिप्पणी की.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने इस पूरे मामले को 'स्तब्ध करनेवाला' बताया है.

पिछले साल नवंबर में एक ईसाई महिला आसिया बीबी को हुई सज़ा के बाद ईश निंदा क़ानून चर्चा में रहा है.

हालांकि आसिया बीबी पैग़म्बर मोहम्मद के शान में किसी गुस्ताख़ी की बात से इनकार करती हैं.

इस साल जनवरी में ही पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या कर दी गई थी.

पुलिस के अनुसार हत्या करनेवाले सलमान तासीर के अंगरक्षक ने कहा कि उसने ऐसा इसीलिए किया क्योंकि तासीर ईश निंदा क़ानून का विरोध कर रहे थे.

भय का माहौल

संवाददाताओं का कहना है कि इस घटना के बाद से पाकिस्तान में भय का ऐसा माहौल पैदा हुआ है कि लोग इस क़ानून का ज़िक्र तक करने से कतराते हैं.

समीउल्लाह के ख़िलाफ एक स्कूल अधिकारी के मामले की शुरुआत किया जाना ही चिंता का विषय है, लेकिन फिर पुलिस और न्यायालय के एक किशोर को जेल भेज देने की घटना आश्चर्यचकित करती है.

बेडी शेपर्ड, ह्यमन राइट्स वॉच अधिकारी

इस क़ानून के आलोचकों का कहना है कि इसका इस्तेमाल देश के अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ किया गया है और कई बार तो व्यक्तिगत दुश्मनी के मामलों में भी इसका दुरुपयोग होता है.

ह्यमन राइट्स वॉच की वरिष्ठ अधिकारी बेडी शेपर्ड का कहना है, "समीउल्लाह के ख़िलाफ एक स्कूल अधिकारी के मामले की शुरुआत किया जाना ही चिंता का विषय है, लेकिन फिर पुलिस और न्यायालय के एक किशोर को जेल भेज देने की घटना आश्चर्यचकित करती है."

पुलिस का कहना है कि मोहम्मद समीउल्लाह के ख़िलाफ़ स्कूल बोर्ड के अधिकारी की शिकायत के बाद केस दर्ज किया गया था.

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