क्या बिगड़ेंगे पाक-अमरीका संबंध?

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Image caption रेमंड डेविस को पाकिस्तान में गिरफ़्तार किया गया है

अमरीकी वाणिज्य दूतावास में काम करने वाले रेमंड डेविस पाकिस्तान और अमरीका के बीच तनाव का कारण बन गए हैं. रेमंड डेविस के खिलाफ़ पाकिस्तान में हत्या का इलज़ाम है और अमरीका उन्हें पाकिस्तान में अपने दूतावास का मुलाज़िम बताता है.

पाकिस्तान रेमंड डेविस के खिलाफ़ दो पाकिस्तानी नागरिकों की हत्या के इलज़ाम में मुक़द्दमा चला रहा है. लेकिन अमरीका पाकिस्तान से बार-बार ज़ोर देकर कह रहा है कि उनकी हिरासत ग़ैर कानूनी है और रेमंड डेविस को फ़ौरन रिहा करना चाहिए.

रेमंड डेविस की असलियत कुछ भी हो वो अमरीका और पाकिस्तान के बीच आपसी संबंध में तनाव का कारण ज़रूर बन गए हैं.

हमारे एक सवाल के लिखित जवाब में अमरीकी विदेश मंत्रालय ने कहा, "ओबामा प्रशासन और कांग्रेस के सदस्यों ने उच्च स्तर पर बार-बार यह साफ़ किया है कि पाकिस्तानी सरकार इस मुद्दे को जल्द सुलझाए वरना इसका असर दोनों देशों के आपसी रिश्ते पर पड़ सकता है. "

अमरीकी मदद

विशेषज्ञ इस बात का ये मतलब निकाल रहे हैं कि अमरीका कड़े शब्दों में पाकिस्तान को पैग़ाम दे रहा है कि दोनों देशों के बीच संबंध खराब हो सकते हैं.

अमरीका हर साल पाकिस्तान को एक अरब डॉलर से अधिक की मदद देता है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी मार्च में अमरीका का सरकारी दौरा करने वाले हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान दबाव महसूस कर रहा है. लेकिन अमरीका का ही दबाव नहीं बल्कि अपनी जनता और मीडिया का भी.

दूसरी तरफ़ आतंकवाद के खिलाफ़ अमरीकी लड़ाई में पाकिस्तान अमरीका का एक अहम सहयोगी है. पाकिस्तान की भी अमरीका को उतनी ही ज़रुरत है जितनी पाकिस्तान को अमरीका की.

मंगलवार को एक प्रेस कांफेरेंस में अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आपसी रिश्ते के बिगड़ने की बात नहीं की.

उन्होंने केवल इस बात को दोहराया था की रेमंड डेविस अमरीकी दूतावास में काम करते थे और इसी लिए उनके खिलाफ़ पाकिस्तान में मुकद्दमा नहीं चलाया जा सकता और यह कि उनकी गिरफ़्तारी ग़ैर कानूनी है, उन्हें फ़ौरन रिहा किया जाए.

एक दूसरे की ज़रूरत

विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने पिछले हफ्ते राष्ट्रपति ज़रदारी को फ़ोन करके रेमंड की रिहाई की मांग की थी. उन्होंने जर्मनी में एक सम्मलेन के दौरान भी पाकिस्तानी सेना के अध्यक्ष जनरल कयानी से इस मांग को दोहराया है.

रेमंड को पाकिस्तान ने २७ जनवरी को दो पाकिस्तानी नागरिकों की हत्या के इलज़ाम में गिरफ्तार किया था.रेमंड का कहना है की वो लुटेरे थे और उन्होंने अपना बचाव करने के लिए उन पर गोलियां चलाई थीं.

पाकिस्तान के सरकारी सूत्रों ने बताया की जिन दो लोगों की हत्या की गई है वो लुटेरे नहीं थे. पाकिस्तान का यह भी दावा है है कि रेमंड अमरीकी दूतावास में काम नहीं करते हैं बल्कि एक निजी अमरीकी कंपनी के मुलाज़िम हैं. पाकिस्तान उनकी शनाख्त का पता लगा रहा.

अब सवाल यह पैदा होता है कि क्या पाकिस्तान अमरीकी दबाव में आ सकता है? या क्या अमरीका पाकिस्तान में अपने खिलाफ़ हवा को देखते हुए पाकिस्तान पर दबाव कम करेगा?

दोनों देशों को एक दूसरे की ज़रुरत है. इस लिए इस तनाव को ख़त्म करने की भी दोनों देश कोशिश करेंगे. ऐसा संभव है कि पाकिस्तान रेमंड को रिहा कर दे लेकिन इस में समय लग सकता है, उस वक़्त तक जब तक यह मामला पाकिस्तान में गर्म है.

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