तासीर के हत्यारे पर अभियोग लागू

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Image caption सलमान तासीर को उन के सुरक्षागार्ड ने चार जनवरी को गोली मार दी थी.

पाकिस्तान की एक अदालत ने पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या के अभियुक्त मुमताज़ क़ादरी पर अभियोग लागू कर दिया है.

रावलपिंडी की आतंकवाद निरोधी अदालत के जज इख़लाक़ अहमद ने सलमान तासीर की हत्या के मामले की सुनवाई करते हुए अभियुक्त क़ादरी पर अभियोग लागू करने का फ़ैसला सुना दिया. क़ादरी पर अब मामला चलाया जाएगा.

अभियुक्त मुमताज़ क़ादरी के वकील शुजा-उर-रहमान ने बीबीसी को बताया कि जज ने हत्या से संबधित सभी दस्तावेज़ों को देखा और फ़ैसला सुनाया कि अभियुक्त मुमताज़ क़ादरी ने हत्या की है.

उन्होंने कहा कि अभियुक्त ने अदालत को बताया कि उन्होंने किसी निर्दोष व्यक्ति को नहीं मारा बल्कि ईश-निंदा क़ानून को काला क़ानून कहने वाले व्यक्ति की हत्या की.

इस मामले की अगली सुनवाई 26 फ़रवरी को होगी जिस में गवाहों के बयान अदालत में रिकॉर्ड किए जाएंगे.

वैलेंटाईन कार्ड

इस मुक़दमे की सुनवाई सुरक्षा कारणों से रावलपिंडी की अड्याला जेल में ही की जाती है जहाँ अभियुक्त मुमताज़ क़ादरी क़ैद हैं.

सुनवाई के दौरान कुछ लोगों ने जेल अधिकारियों को मुमताज़ क़ादरी के लिए वैलेंटाईन दिवस पर कार्ड और फ़ूल सौंपे.

सलमान तासीर की हत्या के अभियुक्त मुमताज़ क़ादरी ने 10 जनवरी को अदालत में अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था.

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Image caption मुमताज़ क़ादरी को जब पहली बार अदालत में पेश किया गया था तो उन्हें लोगों ने फूल पहनाए थे.

क़ादरी ने अदालत को बताया था कि उन्होंने सलमान की हत्या से तीन दिन पहले उन्हें मारने का फ़ैसला लिया था.

अपने इकबालिया बयान में क़ादरी ने कहा था कि रावलपिंडी में एक धार्मिक सभा हुई थी जिस में कुछ मौलवियों ने भाषण दिए थे और ईश-निंदा क़ानून पर टिप्पणी के लिए सलमान तासीर की कड़ी आलोचना की गई थी.

तासीर की हत्या

ग़ौरतलब है कि चार जनवरी को इस्लामाबाद में सलमान तासीर के सुरक्षागार्ड मुमताज़ क़ादरी ने उनकी हत्या कर दी थी.

पुलिस के अनुसार इस्लामाबाद के कोहसार मार्केट में मुमताज़ क़ादरी ने उस समय गोलियाँ चलाईं थीं जब तासीर अपनी गाड़ी से उतर रहे थे.

करीब एक महीना पहले सलमान तासीर ने ईश-निंदा के आरोप में मौत की सज़ा काट रही ईसाई महिला आसिया बीबी से मुलाक़ात की थी और उनकी माफ़ी के लिए राष्ट्रपति से अनुरोध करने का आश्वासन दिया था.

इसके बाद से उन्हें धमकियाँ मिल रही थीं.

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