संयुक्त ऑपरेशन नहीं था- ज़रदारी

आसिफ़ अली ज़रदारी
Image caption ज़रदारी ने अपने लेख में कहा है कि पाकिस्तान दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा शिकार है.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने वाशिंगटन पोस्ट में छपे अपने एक लेख में कहा है कि ओसामा बिन लादेन को मारने वाला ऑपरेशन अमरीका और पाकिस्तान के बीच एक संयुक्त अभियान नहीं था.

हालांकि ज़रदारी ने भी लिखा है कि अमरीका और पाकिस्तान के बीच एक दशक तक चले सहयोग की वजह से ही ओसामा बिन लादेन को मारने में सफलता मिली है.

ज़रदारी ने अपने लेख में इस बात से इंकार किया कि बिन लादेन का उनके देश में मारा जाना आतंकवाद से लड़ने में पाकिस्तान की विफलता का संकेत है.

ज़रदारी ने वाशिंगटन पोस्ट में लिखा है कि उनका देश "शायद दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा शिकार है."

अल क़ायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन को अमरीकी सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान के ऐबटाबाद में मार दिया था. माना जाता है कि बिन लादेन ने 11 सितंबर 2001 को न्यूयॉर्क और वाशिंगटन पर हमले के आदेश दिए थे.

अमरीकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं पाकिस्तान को बिन लादेन के ठिकाने के बारे में शायद पता था.

'भारी क़ीमत'

लेकिन वाशिंगटन पोस्ट में छपे संपादकीय में ज़रदारी ने ऐसे संकेतों को ख़ारिज करते हुए लिखा है, "मीडिया पाकिस्तान को जिस कट्टरपंथ का केंद्र बताता है, वैसा कट्टरपंथ पाकिस्तान में ना तो कभी रहा है, ना रहेगा. ऐसी निराधार अटकलें टीवी चैनलों पर रोमांचक लगती हैं लेकिन ये तथ्य को प्रतिबिंबित नहीं करती."

ज़रदारी आगे लिखते हैं, "अल क़ायदा से घृणा करने की जितनी वजह किसी अन्य देश के पास है उतनी ही पाकिस्तान के पास भी है.'आतंकवाद के ख़िलाफ़' जंग जितनी अमरीका की है उनती ही पाकिस्तान की भी है."

उन्होंने लिखा है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ अपने स्टैंड के कारण भारी क़ीमत चुकाई है, "नेटो सैनिकों से अधिक हमारे फ़ौजी मारे गए हैं. दो हज़ार पुलिसकर्मी, कम से कम 30 हज़ार मासूम नागरिक मारे गए हैं."

इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता सैयद शोएब हसन कहते हैं कि राष्ट्रपति की ये टिप्पणियां हैरान करने वाली नहीं है.

हमारे संवाददाता के अनुसार पाकिस्तान में सरकार बहुत ही मुश्किल स्थिति में है क्योंकि लोग गुस्से में है और उधर अमरीका जानना चाहता है कि क्या कोई अन्य 'वांटेड' लोग उस देश में तो मौजूद नहीं हैं.

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