ऐबटाबाद घटना की जांच की मांग

नवाज़ शरीफ़
Image caption 'एजेंसियाँ अपनी नाक के नीचे नहीं देखतीं'

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी और ऐबटाबाद में अमरीकी अभियान की जाँच के लिए न्यायिक आयोग की माँग की है.

नवाज़ शरीफ़ विपक्षी पार्टी मुस्लिम लीग (नवाज़) के प्रमुख हैं और उन्होंने अपनी पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक के साथ पत्रकारों को संबोधित किया.

उन्होंने पत्रकार वार्ता में बताया, “यह आयोग सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी की अध्यक्षता में होना चाहिए जिसमें चारों प्रांतों और इस्लामाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीशों को भी शामिल किया जाए.”

उन्होंने आगे कहा, “इस घटना की जाँच एक ऐसा आयोग करे जिस को किसी भी अधिकारी को तलब करने का अधिकार हो ताकि जाँच निष्पक्ष तरीक़े से हो सके.”

'बड़ी चूक'

नवाज़ शरीफ़ ने ख़ुफ़िया एजंसियों और दूसरे इदारों के काम पर कड़ी आलोचना की और कहा कि यह घटना सरकार की बड़ी चूक को दर्शाता है.

उन्होंने ने इस घटना केलिए प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी की ओर से बनाई गई जाँच समीति को ख़ारिज कर दिया.

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने सोमवार को संसद में भाषण देते हुए ऐबटाबाद में हुई अमरीकी कार्रवाई की जाँच के आदेश दिए थे.

नवाज़ शरीफ़ पत्रकारों को बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को एक पत्र लिख कर मांग की है कि यह आयोग अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की पाकिस्तान की मौजूदगी और ऐबटाबाद में अमरीकी अभियान के तथ्यों का भी पता लगाए.

'एक तरफ़ा कार्रवाई'

उन्होंने कहा, “यह आयोग इस बात की भी जाँच करे कि क्या अमरीका को पाकिस्तानी भूमि पर इस प्रकार की कार्रवाई की अनुमति देने के लिए कोई समझौता है और अगर है तो इस समझौते की संवैधानिक हैसियत क्या है?”

उन के अनुसार ऐबटाबाद घटना से पाकिस्तानी सेना का मनोबल भी प्रभावित हुआ है और आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध में पाकिस्तानी भूमिका पर भी सवालव उठाए जा रहे हैं.

उन्होंने ख़ुफ़िया एजेंसियों की आलोचना करते हुए कहा कि वह नेताओं की गतिविधियों पर नज़र रखती हैं लेकिन अपनी नाक के नीचे नहीं देखती हैं.

जब उन के पूछा गया कि अगर सरकार उन की माँग पूरी नहीं करती है तो वे क्या करेंगे जिस पर उन्होंने कहा कि अगर सरकार आयोग का गठन नहीं करती है तो उस का यह अर्थ है कि वह मामले की गंभीरता को नहीं जानती.

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