'सीआईए-आईएसआई के बीच सहयोग ख़त्म'

गिलानी
Image caption प्रधानमंत्री ने ऐबटाबाद में कार्रवाई पर संसद में भी बयान दिया था

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा है कि अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए और आईएसआई के बीच सहयोग ख़त्म हो गया है.

उन्होंने इस्लामाबद में अंग्रेज़ी पत्रिका ‘टाइम’ को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा, “अगर अमरीका ने पाकिस्तान के साथ विश्वास बहाली के लिए उचित क़दम नहीं उठाए तो अमरीका के साथ चलना मेरी सरकार को मुश्किल में डाल सकता है.”

यूसुफ़ रज़ा गिलानी बार-बार ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में बढ़ते हुए तनाव की शिकायत करते रहे.

उन्होंने कहा कि सीआईए और आईएसआई के बीच सहयोग ख़त्म होने का कारण अमरीका और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध और अफ़ग़ानिस्तान से अतंरराष्ट्रीय सेना के निलाकने की रणनीति पर मतभेद हैं.

उन्होंने पहली बार कहा कि वे पाकिस्तान के क़बायली इलाक़ों में अमरीकी ड्रोन विमानों के हमलों का खुल कर समर्थन करते हैं, अगर अमरीका हमले से पहले पाकिस्तान को विश्वास में ले.

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है और ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद पाकिस्तान में अमरीका विरोधी भावनाएँ बढ़ रही हैं.

उन्होंने अमरीका से कहा, “मैं सैन्य शासक नहीं हूँ, मैं एक आवामी शख़्सियत हूँ. अगर लोगों की राय आपके ख़िलाफ़ हो तो मैं आपके साथ खड़ा नहीं हो सकता बल्कि मुझे जनता की राय के साथ चलना है.”

'अमरीका विरोधी भावनाएँ बढ़ी'

टाइम पत्रिका के अनुसार ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद अमरीका में एक तरफ़ यह मांग की जा रही है कि सहयोग के लिए पाकिस्तान पर दबाव डाला जाए वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के भीतर अमरीका विरोधी भावनाएं बढ़ रही हैं.

ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ हुई अमरीकी कार्रवाई का ज़िक्र करते प्रधानमंत्री ने कहा, “ज़ाहिर हैं हमें आश्चर्य हुआ कि अमरीका ने एकतरफ़ा कार्रवाई क्यों की, जबकि हम आतंकवाद के ख़िलाफ़ मिल कर लड़ रहे हैं.”

उन्होंने बताया कि अमरीकी कार्रवाई के बारे में उन्हें सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी ने रात को दो बजे बताया था, जिसके बाद उन्होंने विदेश सचिव सलमान बशीर को फ़ोन कर अमरीकी राजदूत को तलब करने का कहा था.

उन्होंने बताया, “अमरीकी कार्रवाई को लेकर अब तक मेरी किसी अमरीकी अधिकारी से बात या मुलाक़ात नहीं हुई है और मुझे सभी ख़बरें मीडिया से मिल रही हैं इसलिए मैं चाहता हूँ कि अमरीका सीधे तौर पर मुझे से संपर्क करे.”

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि अमरीका के साथ संबंधों में तनाव से पाकिस्तान के भीतर आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध को भी नुक़सान पहुँच सकता है.

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