'आईएसआई प्रमुख का इस्तीफ़ा नामंज़ूर'

शुजा पाशा

पाकिस्तान के प्रधामंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख जनरल अहमद शुजा पाशा के इस्तीफ़े की पेशकश को ठुकरा दिया है.

इससे पहले शुक्रवार को जनरल शुजा पाशा ने कहा था कि वो ऐबटाबाद घटना की ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफ़ा देने को तैयार हैं.

उन्होंने शुक्रवार को संसद में ऐबटाबाद में अमरीकी सैनिकों की कार्रवाई में ओसामा बिन लादेन की मौत पर विस्तार से जानकारी दी.

उन्होंने संसद को बताया कि ओसामा बिन लादेन की जानकारी न होना ख़ुफ़िया एजेंसियों की नाकामी है और उन्होंने सेनाध्यक्ष को अपने इस्तीफ़े का प्रस्ताव दिया था लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया. बाद में उन्होंने अपने इस्तीफ़े का प्रस्ताव प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी को दिया है.

जनरल शुजा पाशा ने कहा कि आईएसआई और सीआईए के बीच ओसामा बिन लादेन से संबंधित पूरी जानकारी का आदान-प्रदान होता था और अमरीका ने एक तरफ़ा कार्रवाई कर पाकिस्तान के विश्वास को ठेस पहुँचाई है.

'सेना संसद के सामने'

पाकिस्तान के इतिहास में ये दूसरी बार है कि जब सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने किसी मुद्दे पर संसद में घटना का विवरण दिया और सांसदों के सवालों का भी जवाब दिया. इससे पहले 2008 में भी बढ़ते हुए चरमपंथ और आतंकवाद को लेकर संसद को संबोधित किया गया था.

अमरीका ने पाकिस्तान को अंधेरे में रख कर एकतरफ़ा कार्रवाई की और ओसामा बिन लादेन की ऐबटाबाद में मौजूदगी की जानकारी न होना ख़ुफ़िया एजेंसियों की चूक है.

जनरल शुजा पाशा, आईएसआई प्रमुख

दो बार सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को संसद के सामने ला कर खड़ा कर देने का श्रेय पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी को ही जाता है.

जनरला पाशा ने सांसदों से कहा कि अमरीका ने पाकिस्तान को अंधेरे में रख कर एक तरफ़ा कार्रवाई की.

उन्होंने कहा कि वो आईएसआई प्रमुख की हैसियत से खुद को संसद के सामने पेश करते हैं और अपनी ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हैं.

उन्होंने बताया कि वो प्रधानमंत्री, संसद से लेकर देश में हर जगह जवाबदेही के लिए तैयार हैं .

'ओसामा की मौत'

पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में दो मई को अमरीकी सेना के विशेष दल ने एक घर पर कार्रवाई कर दुनिया के सबसे वांछित व्यक्ति और अल क़ायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार दिया था.

ग़ौरतलब है कि अमरीका ने पाकिस्तानी सरकार को बिना जानकारी दिए इस अभियान को अंजाम दिया और जब ओसामा बिन लादेन को मार दिया गया तो फिर पाकिस्तानी अधिकारियों को सूचित किया गया.

पाक सेना

संसद के विशेष सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी.

पाकिस्तान सरकार ने इस एक तरफ़ा कार्रवाई पर आपत्ति जताई है, साथ ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं और उसे कड़ी ओलाचना का सामना करना पड़ा है.

देश के भीतर और बाहर ये सवाल उठाए जा रहे हैं कि आख़िरकार ओसामा बिन लादेन की पाकिस्तान में मौजूदगी की जानकारी पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसियों ख़ासकर आईएसआई को क्यों नहीं थी और अगर थी तो उन के ख़िलाफ़ कार्रवाई क्यों नहीं की गई थी?

ओसामा बिन लादेन ऐबटाबाद के इलाक़े बिलाल टाउन में रह रहे थे जो पाकिस्तानी सेना के मुख्य प्रशिक्षण केंद्र से बेहद करीब है. अधिकारी बताते हैं कि वो उस घर में पांच साल रहे.

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने ऐबटाबाद घटना के बारे में संसद में भाषण दिया और ओमाना बिन लादेन की मौजूदगी की जानकारी न होने और उन की मौत की जाँच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जिस ने जाँच भी शुरु कर दी है.

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सेना से कहा था कि वो ऐबटाबाद की घटना पर संसद को ब्रीफ़िंग दे.

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.