सुरक्षा और विदेश नीतियों पर पुनर्विचार हो: संसद

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पाकिस्तानी संसद की संयुक्त बैठक ने सर्वसम्मति से देश की सुरक्षा और विदेश नीतियों पर पुनर्विचार करने की मांग की है.

संसद की ये बैठक अल-क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ किए गए अमरीकी ऑपरेशन के मद्देनज़र बुलाई गई थी.

हालांकि इस कार्रवाई में अमरीकी ओसामा को मारने में सफ़ल रहे, पाकिस्तान की जनता इसे अपनी संप्रभूता में दख़लअंदाज़ी मान रही है और इसे लेकर सरकार और सेना से गंभीर सवाल पूछ रही है.

नैटो स्पलाई

संसद के दोनों सदनों के प्रतिनिधियों ने अमरीकी चालक रहित विमान यानि ड्रोन हमलों को पूरी तरह से स्थगित करने की मांग की है.

सांसदो ने कहा है कि अगर अमरीका ऐसा करने से मना करता है तो पाकिस्तान होकर भेजे जानेवाले नैटो सेना की सप्लाई बंद कर दी जाए.

प्रतिनिधियों ने ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ की गई अमरीकी कार्रवाई की स्वतंत्र जाँच की भी मांग की.

उनका कहना था कि अमरीकी कार्रवाई पाकिस्तान की संप्रभूता का उलंघन थी.

ऑप्रेशन के बाद अमरीका ने कहा था कि उसने इस कार्रवाई की ख़बर पाकिस्तान को नहीं दी थी क्योंकि इसके लीक हो जाने का ख़तरा था.

इससे पहले पाकिस्तानी ख़ुफ़िया ऐजेंसी आईएसआई के प्रमुख शुजा पाशा को संसद के सामने सवाल-जवाब के लिए पेश होना पड़ा था.

मुश्किल सवालों के घेरे में आए शुजा पाशा ने अपने पद से त्यागपत्र देने का प्रस्ताव भी रखा था.

लेकिन इसे मानने से इंकार कर दिया गया.

दिखावा या सच?

इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता अलीम मक़बूल का कहना है कि पाकिस्तान में ऐसा पहली बार ऐसा हुआ है कि देश की ख़ुफ़िया ऐजेंसी के प्रमुख को पहले तो संसद के सामने पेश होने को मजबूर किया गया है और फिर उनपर मुश्किल सवालों की ऐसी झड़ी लगाई गई हो.

कुछ सांसदों ने बीबीसी संवाददाता से कहा कि सांसद इस क़दर गुस्से में थे कि शुज़ा पाशा को ये कहने के लिए मजबूर होना पड़ा कि उनके साथ दुश्मनों सा व्यवहार किया जा रहा है.

कुछ प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि उन्होंने ये साफ़ कर दिया है कि अब देश के सभी मामलों पर अंतिम निर्णय नागरिक सरकार का होगा न कि सेना और ख़ुफ़िया ऐजेंसियों का जैसा की अबतक होता रहा है.

लेकिन जानकारों का मानना है कि इन दावों में कितना सच है और कितना दिखावा ये कह पाना मुश्किल है.

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