'पाक अमरीका रिश्ते मियां बीवी की तरह'

शुजा नवाज़
Image caption शुजा नवाज़ वाशिंगटन स्थित पाकिस्तानी बुद्धिजीवी हैं.

पाकिस्तान के शहर ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के खिलाफ़ अमरीकी कार्रवाई से अमरीका और पाकिस्तान के बीच रिश्ते में एक बड़ा संकट पैदा हो गया है. लेकिन वाशिंगटन में एक पाकिस्तानी बुद्धिजीवी शुजा नवाज़ के अनुसार रिश्ते इतने भी नहीं बिगड़े हैं जितना बाहर से लग रहा है.

उनका कहना है, "अगर रिश्ता इतना ही बिगड़ जाता तो पाकिस्तानी सरकार चमन और ख़ैबर में अफ़गानिस्तान के लिए जाने वाली अमरीकी सप्लाई को रोक सकते थे."

शुजा नवाज़ वाशिंगटन में अटलांटिक काउन्सिल नामी एक संस्था के दक्षिण एशिया के अध्यक्ष हैं,

वो कहते हैं कि अमरीका और पाकिस्तान के बीच मियाँ बीवी जैसे संबंध है जिस में झगडे अकसर होते रहते हैं लेकिन 'अभी तलाक़ की नौबत' नहीं आई है.

ऐबटाबाद में अमरीकी संचालन से होने वाली शर्मिंदगी से पाकिस्तानी सेना और आईएसआई अब संभलते नज़र आते हैं लेकिन शुजा नवाज़ के अनुसार ये पाकिस्तानी सरकार और राजनितिज्ञों के लिए पाकिस्तानी सेना को सियासत से बेदखल करने का एक सुनहरा मौक़ा था.

'सियासतदानों ने खोया अवसर'

शुजा नवाज़ कहते हैं, "सिविलियन अधिकारियों के लिए यह एक बहुत अच्छा मौक़ा था के वो इस मौके पर नेतृत्व दिखाते. लेकिन उन्होंने ये सब छोड़ दिया है फ़ौज के हवाले. ये पूरे पाकिस्तान के लिए शर्म की बात थी. फ़ौज को तनक़ीद का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन ये मौक़ा गंवा दिया गया."

पाकिस्तान के कुछ विशेषज्ञ यह मांग कर रहे हैं की राष्ट्रीय मामलों में पाकिस्तानी सेना का दखल नहीं होना चाहिए. शुजा नवाज़ ने पाकिस्तानी सेना पर 'क्रोस स्वोर्ड्ज़' नामी एक किताब लिखी है.

वे कहते हैं पाकिस्तानी सेना की भूमिका पर फिर विचार करने की ज़रुरत है, "एक पुनर्विचार की ज़रुरत है कि सेना की भूमिका क्या हो, ख़ास तौर से अल-कायदा और तालिबान को लेकर. एक नई सोच की ज़रुरत है. जो आएगी लेकिन इतनी जल्दी नहीं."

बुधवार को राष्ट्रपति बराक ओबामा की डेमोक्रेटिक पार्टी के पांच सदस्यों ने प्रशासन को एक चिठ्ठी लिखी जिसमें मांग की गई कि अगर पाकिस्तान चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अमरीका की लड़ाई में पूरी मदद नहीं करता तो उसे 1.25 अरब डॉलर सालाना की वित्तीय मदद बंद कर देनी चाहिए.

अमरीका से रिश्ते

अमरीकी प्रशासन संयम से काम ले रहा है लेकिन सरकार से बाहर राजनितिक हस्तियां पाकिस्तान से बहुत नाराज़ हैं.

ऐसा लगता है दोनों देशों के बीच रिश्ते ब्रेकिंग पॉइंट पर आ गए हैं.

लेकिन शुजा नवाज़ कहते हैं दोनों को एक दूसरे की ख़ासी ज़रुरत है, "अफ़गानिस्तान से अपनी सेना को हटाने के लिए अमरीका को पाकिस्तान की सख़्त ज़रुरत है. और पाकिस्तान को अमरीका की वित्तीय मदद की ज़रुरत है. बहुत ज़रूरी है की ये मदद रोक ना दी जाए."

शुजा नवाज़ ने बीबीसी हिंदी डॉट कॉम को दिए एक इंटरव्यू में कहा की उनके विचार में दोनों देश कुछ ऐसा क़दम नहीं उठाएंगे जिससे उनके बीच संबंध टूट जाएँ.

शुजा नवाज़ ने बीबीसी को बताया, "मैं समझता हूँ की कोई ऐसी प्रतिक्रिया न पाकिस्तान से आएगी और न ही अमरीका से जो इस जोड़ को तोड़ दे."

भारत से सीख सकता है पाक

पाकिस्तान और अमरीका के बीच रिश्तों में पिछले कुछ सालों में कई बार दरार पड़ चुकी है. कुछ विशेषज्ञों के विचार में ये रिश्ता स्वाभाविक नहीं है.

शुजा नवाज़ इस विचार से सहमत हैं, "अमरीका का वैश्विक हित होता है जिसमें वो कभी-कभी पाकिस्तान को शामिल कर लेता है. पाकिस्तान का क्षेत्रीय हित होता है. तो दोनों में इत्तेफाक नहीं होता."

कई विशेषज्ञों की तरह शुजा नवाज़ भी इस विचार पर यकीन रखते हैं की पाकिस्तान को अमरीका के बजाए भारत से बेहतर संबंध रखने में अधिक फ़ायदा है.

वे कहते हैं कि इस तरफ कदम उठाए भी जा चुके हैं, "मैं समझता हूँ की दक्षिण एशिया में पाकिस्तान और भारत के दरमियान हालात बेहतर हुए हैं. कुछ ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं जिन्हें अगर कामयाबी से लागू किया जाए तो दोनों देशों को फ़ायदा होगा. भारत से पाकिस्तान बहुत कुछ सीख सकता है."

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