सियाचिन पर भारत-पाक रक्षा सचिवों की बातचीत

सियाचिन इमेज कॉपीरइट BBC World Service

तीन साल के अंतराल के बाद भारत और पाकिस्तान के रक्षा सचिवों को बातचीत दिल्ली में हो रही है. इस बातचीत में सियाचिन ग्लेशियर और उससे जुड़े विवाद पर चर्चा होगी.

महत्वपूर्ण है कि दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में बातचीत का सिलसिला फ़रवरी में भारत-पाक विदेश सचिवों की थिम्पू में हुई बैठक के बाद शुरु हुआ है.

इस बैठक के बाद भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालयों की ओर से लगभग उन्ही शब्दों में जारी अलग-अलग बयानों में कहा गया था कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की थिम्पू में अप्रैल 2010 में बातचीत के बाद बैठकों का सिलसिला आगे बढ़ाने पर आम सहमति बनी है.

ग़ौरतलब है कि दोनों देशों के बीच समग्र वार्ता प्रक्रिया पर नवंबर 2008 के मुंबई हमलों के बाद विराम लगा हुआ था. भारत की ओर से बातचीत के लिए लगातार ये शर्त लगाई जा रही थी कि पाकिस्तान अपनी भूमि पर भारत-विरोधी चरमपंथ के नेटवर्क को नष्ट करे.

लेकिन फ़रवरी 2011 में विदेश सचिवों की बैठक के बाद जिन मुद्दों पर चर्चा होनी तय हुई वे हैं - आतंकवाद का सामना (जिसमें मुंबई हमलों का मुकदमा शामिल है), मानवीय मुद्दे, शांति और सुरक्षा (जिसमें विश्वास बढ़ाने के क़दम शामिल हैं), जम्मू और कश्मीर, दोनों देशों के बीच दोस्ताना रिश्तों के बढ़ाने के आदान-प्रदान, सियाचिन, आर्थिक मुद्दे, वूलर बराज, तुलबुल परियोजना, सर क्रीक.

जानकारों का मानना है कि ये सब वही मुद्दे हैं जिनपर समग्र वार्ता प्रकिया के दौरान बातचीत हो रही थी, केवल इस समग्र वार्ता शब्दावली का इस्तेमाल नहीं हो रहा है.

सियाचिन और 110 किलोमीटर का सीमा विवाद

विदेशों सचिवों की बैठक के बाद दोनों देशों के गृह सचिवों की बैठक इस साल मार्च में हुई थी और फिर दोनों पक्षों के वाणिज्य सचिवों की बैठक इस साल अप्रैल में हुई थी.

इस बार रक्षा सचिवों की बैठक तीन साल के बाद हो रही है. ग़ौरतलब है कि सियाचिन ग्लेशियर के मुद्दे पर सबसे पहले 1985 में हुई थी जब भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल ज़िया-उल-हक़ थे.

सियाचिन ग्लेशर को दुनिया के सबसे ऊचा जंग का मैदान माना जाता है. यह पाकिस्तान और भारत प्रशासित कश्मीर से सटा हुआ है.

Image caption भारत-पाक वार्ता के नए घटनाक्रम में विदेश सचिवों, गृह सचिवों और वाणिज्य सचिवों की बात हो चुकी है

दो दिनों की बातचीत में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव प्रदीप कुमार कर रहे हैं जबकि पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सेवानिवृत्त लेफ़्टेनेंट जनरल सईद अथर अली कर रहे हैं.

भारतीय पक्ष में विशेष सचिव आरके माथुर, सैन्य ऑपरेशन्स के महानिदेशक लेफ़्टिनेंट जनरल एएम वर्मा और सरवेयर जनरल एस सुभा राव हैं.

पाकिस्तानी पक्ष में चार सैन्य अधिकारी और दो असैन्य अधिकारी हैं.

सियाचिन ग्लेशियर का मुद्दा और मतभेद 110 किलोमीटर लंबी एक्चुयल ग्राऊंड पोसीशन लाइन कहाँ-कहाँ से गुज़रती है - इस पर है. ये लाइन सोलटोरो रिज और सियाचिन ग्लेशर से होकर गुज़रती है.

भारतीय सेना सोलटोरो रिज में प्रभावशाली स्थिति में जमी हुई है और चाहती है कि पाकिस्तान उसके रूख से सहमत हो. उधर पाकिस्तान 1972 के भारत-पाक शिमला समझौते की स्थिति चाहता है.

दोनों देशों के बीच वर्ष 2003 में संघर्षविराम हुआ था और अब दोनों देशों को तय करना है कि यदि सियाचिन से सैनिकों की संख्या और तैनाती को घटाना है तो उसकी क्या प्रकिया होगी.

महत्वपूर्ण है कि इस बातचीत से मात्र एक दिन पहले भारत के रक्षा मंत्री एके एंटनी ने आरोप लगाया था कि 'पाकिस्तान में लगभग 42 आतंकवादी शिविर सक्रिय है और इन्हें नष्ट किए बिना भारत-पाक रिश्तों में स्थायी सहयोग मुश्किल है.'

उधर पाकिस्तान लगातार इन आरोपों का खंडन करता रहा है.

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