पाक अधिकारियों से मिले सीआईए प्रमुख

लीओन पेनेटा
Image caption ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद सीआईए प्रमुख की यह पहली पाकिस्तान यात्रा है.

अमरीका की ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के प्रमुख लीओन पेनेटा ने अल-क़ायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद दोनों देशों के बीच ख़राब होते संबंधों के परिप्रेक्ष्य में पाकिस्तानी अधिकारियों से मुलाक़ातें की है.

पिछले महीने ऐबटाबाद में हुई अमरीकी सैन्य कार्रवाई में ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद सीआईए प्रमुख की यह पहली पाकिस्तान यात्रा है. अधिकारियों के मुताबिक वे अघोषित यात्रा पर पाकिस्तान पहुँचे हैं और अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे कितने दिन और इस्लामाबाद में रहेंगे.

पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सीआईए प्रमुख लीओन पनेटा ने पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनकल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी और ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख लेफ्टीनेंट जनरल अहमद शुजा पाशा से मुलाक़ात की.

'साझा अभियान'

बयान के मुताबिक दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने चरमपंथियों की ख़ुफ़िया जानकारी के आदान-प्रदान और चरमपंथियों के ख़िलाफ़ भविष्य में साझा अभियान के मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की.

ग़ौरतलब है कि ऐबटाबाद शहर में दो मई को अमरीकी सेना के विशेष दल ने एक घर पर कार्रवाई कर दुनिया के सबसे वांछित व्यक्ति और अल क़ायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार दिया था.

अमरीका ने पाकिस्तानी सरकार को बिना जानकारी दिए इस अभियान को अंजाम दिया था और जब ओसामा बिन लादेन को मार दिया गया तो फिर पाकिस्तानी अधिकारियों को सूचित किया गया था.

पाकिस्तान सरकार ने इस एक तरफ़ा कार्रवाई पर आपत्ति जताई थी, साथ ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे थे और उसे कड़ी ओलाचना का सामना करना पड़ा था.

देश के भीतर और बाहर ये सवाल उठाए जा रहे थे कि आख़िरकार ओसामा बिन लादेन की पाकिस्तान में मौजूदगी की जानकारी पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसियों ख़ासकर आईएसआई को क्यों नहीं थी और अगर थी तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई क्यों नहीं की गई थी?

इसी को लेकर अमरीका और पाकिस्तान के संबंधों में काफ़ी तनाव है और दोनों ओर से संबंधों को बेहतर करने की कोशिशें की जा रही हैं.

ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद सबसे पहले अमरीका के वरिष्ठ सांसद जान कैरी ने पाकिस्तान की यात्रा की थी और उसके कुछ दिनों बाद विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भी पाकिस्तान पहुँची थी.

उसी दौरान पाकिस्तान ने देश में मौजूद अमरीकी सैनिकों की संख्या कम करने के लिए अमरीका से मांग की थी जिसपर अमरीका ने अपने कुछ सैनिक पाकिस्तान से वापस बुलाए थे.

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