पत्रकार हत्या, न्यायिक आयोग का आदेश

पाक सुप्रीम कोर्ट
Image caption सुप्रीम कोर्ट ने सलीम शहज़ाद की हत्या की जाँच केलिए आयोग के गठन का आदेश दिया है.

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पत्रकार सलीम शहज़ाद की हत्या की जाँच के लिए एक उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग के गठन का आदेश दिया है और उस आयोग की अध्यक्षता के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ न्यायधीश के नाम का प्रस्ताव भी दिया है.

मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यी खंडपीठ ने पत्रकार संगठन 'पाकिस्तान फ़ेड्रल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स' यानी पीएफ़यूजे की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिए.

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि इस आयोग के दूसरे सदस्य भी सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश होने चाहिए और इसके अधिकार क्षेत्र को भी बढ़ा दिया जाना चाहिए.

अदालत के मुताबिक इससे पहले किसी भी घटना की जाँच के लिए जो भी आयोग बने हैं उसकी रिपोर्ट सर्वजानिक नहीं की जाती लेकिन सलीम शहज़ाद हत्या की जाँच करने वाला आयोग अपनी रिपोर्ट सर्वजानिक करे.

'अदालत की फ़टकार'

पीएफ़यूजे के वकील मुनीर ए मलिक ने अदालत को बताया कि सलीम शहज़ाद की हत्या बुनियादी मानवाधिकारों का मामला है. सरकार और संबंधित संस्थाओं ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जिसकी अपेक्षा की जा रही थी.

मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ़्तिख़ार चौधरी ने अपनी टिप्पणी देते हुए कहा कि अगर सरकार इस गंभीरता को समझे तो यह मामला चार दिनों में भी हल हो सकता था.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में जितने पत्रकारों की भी हत्याएँ हुई हैं अगर सरकार गंभीरता से उसकी जाँच करती तो उस प्रकार से सलीम शहज़ाद की हत्या न होती.

सरकारी वकील बाबर आवाण ने अदालत को बताया कि सरकार, ख़ुफ़िया एजेंसियों और पाकिस्तानी सेना ने भी सलीम शहज़ाद की हत्या की जाँच के लिए आयोग का समर्थन किया है.

'पत्रकार की हत्या'

ग़ौरतलब है कि 29 मई को पत्रकार सलीम शहज़ाद अचानक इस्लामाबाद से ग़ायब हो गए थे और दो दिन बाद पंजाब के ज़िले मंडी बहाऊद्दीन से उनका शव मिला था.

इसके बाद पाकिस्तान में पत्रकारों ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किए थे और उनकी हत्या की जाँच के लिए न्यायिक आयोग के गठन की मांग की थी.

पत्रकारों के भारी विरोध के बाद सरकार ने कुछ दिन पहले एक आयोग का गठन किया था लेकिन पत्रकारों ने उसे मानने से इंकार कर दिया था.

बाद में पत्रकार संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिस पर दालत ने यह आदेश दिया है.

संबंधित समाचार