'नंबरदार चरमपंथियों की जानकारी देंगे'

तालिबान
Image caption पुलिस ने चरमपंथियों को पकड़ने केलिए नंबरदारों की सेवाएँ ली हैं.

पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के ग्रामीण इलाक़ों में प्रतिबंधित संगठनों और चरमपंथियों की गतिविधियों पर नज़र रखने और उनकी जानकारी जुटाने के लिए ज़िले के नंबरदारों की सेवाएँ ली गई हैं.

प्रांतीय सरकार ने इस उद्देश्य के लिए ज़िला साहीवाल को चुना है जहाँ चरमपंथियों की गुप्त गतिविधियों पर नज़र रखने केलिए नंबरदारों को प्रशिक्षण की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है.

अधिकारियों का कहना है कि अब तक तीन सौ नंबरदारों को प्रशिक्षण दिया गया है और प्रशिक्षित नंबरदारों ने पुलसि को ग्रामीण इलाक़ों में चरमपंथियों की ख़ुफ़िया जानकारी देनी शुरु कर दी है.

ज़िला अधिकारी के मुताबिक़ आमतौर पर नंबरदार राजस्व के रिकॉर्ड के साथ साथ भूमि के मामले देखते हैं.

ग़ौरतलब है कि पंजाब प्रांत में गाँव के मुखिया को नंबरदार कहते हैं जिनको सरकार नियुक्त करती है.

ज़िला साहीवाल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अयाज़ सलीम ने बीबीसी को बताया कि आजकल प्रतिबंधित संगठनों की ओर से धन जुटाना और आम लोगों को प्रशिक्षित करने जैसी चुनौतियों का सामना है लेकिन ग्रामीण इलाक़ों में इस प्रकार की जानकारी प्राप्त करना मुश्किल काम है.

'चरमपंथ पर नज़र'

उन्होंने कहा कि चरमपंथियों की गतिविधियों पर नज़र रखने और उनके बारे में जानकारी जुटाने केलिए अब नंबरदारों की सेवाएँ ली गई हैं क्योंकि क़ानून में प्रावधान है कि नंबरदार अपराधियों की जानकारी हासिल कर सकते हैं.

पुलिस अधिकारी के मुताबिक़ गेहूँ की कटाई के दौरान एक प्रतिबंधित जिहादी गुट जैशे मोहम्मद के लोगों को गिरफ़्तार किया गया है जो नाम बदल कर अल-रहमत ट्रस्ट के नाम से आम लोगों से पैसा ले रहे थे.

उन्होंने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों से जो दस्तावेज़ मिले हैं उससे पता चलता है कि वह अपने गुट केलिए धन इकट्ठा कर रहे थे ताकि लोगों को भर्ती कर उन्हें चरमपंथी कार्रवाईयों के लिए प्रशिक्षण दिया जा सके.

अयाज़ सलीम ने कहा कि साहीवाल ज़िले में छह सौ के लगभग गाँव हैं और उन गाँवों में एक हज़ार से ज़्यादा नंबरदार हैं जिन की मदद से चरमपंथियों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी.

उन्होंने बताया कि हर बुधवार को करीब एक सौ नंबरदारों को प्रशिक्षण दिया जाता है और अब तक करीब तीन सौ नंबरदारों को प्रशिक्षित किया जा चुका है.

उनके मुताबिक़ नंबरदारों को सरकार की ओर से मोबाइल फ़ोन दिया गया है जिसके ज़रिए वे चरमपंथियों की ख़ुफ़िया जानकारी एक एसएमएस के ज़रिए देंगे और उस जानकारी को गुप्त रखा जाएगा.

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