'पाक जनरलों ने बेचे परमाणु राज़'

अब्दुल कदीर ख़ान
Image caption अब्दुल क़दीर खान ये आरोप पहले भी लगा चुके हैं.

पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान ने दावा किया है कि उत्तर कोरिया ने पाकिस्तान से परमाणु तकनीक हासिल करने के लिए सैन्य अधिकारियों को रिश्वत दी थी.

अमरीकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट में छपी ख़बर के अनुसार अब्दुल क़दीर ख़ान ने एक उत्तर कोरियाई अधिकारी की ओर से 1998 में लिखा हुआ ख़त उपलब्ध कराया है. अंग्रेज़ी में लिखे इस ख़त में अधिकारी ने रिश्वत का विवरण दिया है और पकिस्तान और उत्तर कोरिया के बीच हुए सौदे पर भी बात की है.

वॉशिंगटन पोस्ट ने कुछ पश्चिमी गुप्तचर सेवा अधिकारीयों और विशेषज्ञों के हवाले से कहा है कि ये पत्र देखने से असली मालूम होता है. जिन पाकिस्तानी अधिकारियों के नाम इस ख़त में हैं उन सबने इस ख़त को नकली करार दिया है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने वॉशिंगटन पोस्ट में छपी इस ख़बर का खंडन किया है.

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तहमीना जंजुआ ने इस्लामाबाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “कुछ अख़बारों को इस तरह की ख़बरें छापने की आदत होती है और यह एक निराधार और बेतुकी ख़बर है.”

पाकिस्तान के अधिकारी कहते आए हैं कि वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान ने परमाणु राज़ बेचने का काम बिना किसी को बताए किया और इसके लिए ख़ान अकेले ज़िम्मेदार हैं.

पकिस्तान पर शक गहराया

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ये ख़त असली है तो ये परमाणु हथियार बेचने का बहुत ही गंभीर मामला माना जाएगा. अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि परमाणु तकनीक की तस्करी में पाकिस्तानी सेना का जुडा होना मामले को और भी गंभीर बना देता है.

वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक दुनिया में कई ऐसे गुट और देश हैं जो परमाणु हथियार या तकनीक हासिल करने के लिए कोई भी कीमत चुका सकते हैं.

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption करामत के ने इस ख़त को अब्दुल कदीर खान द्वारा अपनी गलती दूसरों पर डालने का एक प्रयास बताया

अख़बार ने यह साफ़ किया है कि उनके पास इस ख़त की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने का कोई ज़रिया नहीं था क्योंकि इस ख़त की सच्चाई केवल उन्ही लोगों को मालूम हो सकती है जिनके नाम इस पत्र में हैं.

अख़बार के मुताबिक ख़त से ये समझ में आता है कि पाकिस्तान ने उत्तरी कोरिया को परमाणु बम बनाने का यूरेनियम आधारित फ़ॉर्मूला बताया. उत्तरी कोरिया पहले से ही प्लूटोनियम आधारित मार्ग पर चल कर बम कार्यक्रम पर काम कर रहा था.

कहा जा रहा है कि अब्दुल क़दीर ख़ान द्वारा उपलब्ध कराई गई इस चिट्ठी को कथित तौर पर उत्तर कोरिया की वर्कर पार्टी के सचिव जोन ब्योंग ने लिखा है.

इस गुप्त ख़त में ब्योंग ने कहा है कि एक पाकिस्तानी अधिकारी को "तीस लाख डॉलर का भुगतान पहले ही हो चुका है." साथ ही एक दूसरे पाकिस्तानी अधिकारी को "पांच लाख डॉलर और कुछ ज़ेवर" दिए जा चुके हैं.

अख़बार कहता है कि ख़त में आगे आग्रह किया गया है "तय दस्तावेज़, पुर्जे वगैरह एक उत्तर कोरियाई कूटनयिक को दे दिए जाएँ तकि उत्तर कोरियाई हवाई जहाज़ लौटते समय उनको ले जा सकें."

'आरोप बेबुनियाद'

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption उत्तर कोरिया ने इस पत्र की पुष्टि को लेकर पूछे गए सवालों का कोई उत्तर नहीं दिया है

अख़बार का कहना है कि पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल जहांगीर करामत ही वो अधिकारी हैं जिन्हें तीस लाख डॉलर की रिश्वत मिली थी.

अमरीकी अख़बार ने करामत के हवाले से इस ख़त की बात को अब्दुल क़दीर ख़ान द्वारा अपनी गलती दूसरों पर डालने का एक प्रयास बताया.

जिस दूसरे पाकिस्तानी अधिकारी का ज़िक्र इस ख़त में है उनका नाम लेफ़्टिनेंट जनरल ज़ुल्फ़िकार ख़ान है जिन्होंने इस ख़त को 'जालसाज़ी करार दिया है.'

अब्दुल क़दीर ख़ान ये आरोप पहले भी लगा चुके हैं कि उन्होंने देश के उच्चाधिकारियों की मर्ज़ी से परमाणु बम तकनीक की तस्करी की थी. हालाँकि ये पहली मर्तबा हुआ है जब उन्होंने अपने आरोप के समर्थन में कोई सबूत पेश किया है.

वॉशिंगटन पोस्ट का कहना है कि उसे ये ख़त एक ब्रितानी पत्रकार सायमन एंडरसन ने उपलब्ध कराया है जिसने इसे अब्दुल क़दीर ख़ान से लिया था. अख़बार ने इस बात की पुष्टि कर ली है कि ये ख़त अब्दुल क़दीर ख़ान के पास से आया है.

संबंधित समाचार