ओसामा के लिए फ़र्ज़ी टीका अभियान

ओसामा बिन लादेन का परिसर इमेज कॉपीरइट BBC World Service

एक ब्रितानी अख़बार के अनुसार अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी ने उस इलाक़े में फ़र्जी टीका अभियान चलाया था जहां उसे अल क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन के होने का शक था.

गार्डियन अख़बार के अनुसार इस अभियान के ज़रिए सीआईए ओसामा और उनके परिवार के डीएनए सैंपल हासिल करने की कोशिश कर रही थी जिससे उनकी मौजूदगी की ख़बर को पुख़्ता किया जा सके.

अख़बार का दावा है कि सीआईए के अधिकारियों ने एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के परिसर के बारे में पक्की ख़बर मिलने के बाद एक वरिष्ठ स्थानीय डॉक्टर को आस-पास के इलाकों में टीकाकरण अभियान चलाने के लिए कहा.

ख़तरनाक कार्रवाई

ओसामा के ख़िलाफ़ अपनी लंबी और बेहद ख़तरनाक कार्रवाई शुरू करने से पहले अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी चाहती थी कि एबटाबाद के उस परिसर में रह रहे लोगों का डीएनए सैंपल हासिल किया जाए .

फिर उस सैंपल को ओसामा की बहन के डीएनए सैंपल से मिलाया जाए. ओसामा की बहन का 2010 में अमरीकी शहर बॉस्टन में निधन हो गया था.

अख़बार के अनुसार अमरीकी ये सब कुछ इसलिए कर रहे थे जिससे ओसामा बिन लादेन और उनके परिवार की सही पहचान हो सके और ग़लती से किसी और परिवार पर हमला न हो जाए.

डॉक्टर शकील अफ़रीदी को इस काम के लिए चुना गया. वो अभी पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई की हिरासत में हैं. समझा जा रहा है कि अमरीकी प्रशासन डॉक्टर की सुरक्षा के लिए चिंतित है.

'असली रंग'

डॉक्टर अफ़रीदी ने इस पूरी मुहिम को ‘असली’ रंग देने के लिए ऐबटाबाद के सबसे ग़रीब इलाक़े से टीकाकरण शुरू किया.

उसके बाद उस मुहिम को उस इलाक़े में ले जाया गया जहां ओसामा बिन लादेन के रहने की ख़बर थी.

अख़बार लिखता है कि इस मुहिम के लिए डॉक्टर मार्च में ऐबटाबाद गए और स्थानीय प्रशासन से कहा कि उन्हें हेपेटाइटिस बी के मुफ़्त टीकाकरण के लिए फ़ंड मिला है.

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Image caption अमरीकी कार्रवाई के तहत ओसाम बिन लादेन को पाकिस्तान में मारा गया

ऐबटाबाद के स्वास्थ्य अधिकारियों को नज़रअंदाज़ करके उन्होंने निचले स्तर के सरकारी अधिकारियों को अच्छी रक़म दी जिसके बदले में उन्होंने मुहिम में हिस्सा लिया.

स्वास्थ्य अधिकारियों को इस योजना की असली मंशा के बारे में नहीं पता था. ये स्वास्थ्य अधिकारी उन चंद लोगों में से थे जिन्हे ओसामा बिन लादेन के परिसर में जाने की अनुमति मिली वो भी उनके बच्चों को पोलियो की बूंदे पिलाने के नाम पर.

नर्स का साथ

अख़बार का कहना है कि ये अभी भी पता नहीं चला है कि डॉक्टर ने टीकों की मदद से डीएनए सैंपल हासिल करने की कैसे सोची.

गार्डियन की रिपोर्ट में आगे लिखा है कि एक पाकिस्तानी अधिकारी ने अख़बार को बताया कि पूरा मामला अनियमित था.

उनका कहना था, "जहां ओसामा रहते थे वो धनी इलाक़ा है तो वहां मुफ़्त का टीका क्यों दिया जाएगा. सवाल ये भी है कि एक दूसरे प्रांत में काम कर रहा डॉक्टर ऐबटाबाद में क्या कर रहा था.'

एक नर्स जिसका पूरा नाम इस रिपोर्ट में मुख़्तार बीबी कहा गया है, वो ओसामा बिन लादेन के घर गई.

अंजाम

कई सूत्रो के हवाले से इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस वक़्त नर्स अंदर गईं, डॉक्टर अफ़रीदी बाहर इंतज़ार कर रहे थे.

डॉक्टर ने नर्स को एक हैंडबैग ले जाने के लिए कहा जिसमें एक यंत्र लगा था. ये साफ़ नहीं है कि वो यंत्र क्या था या फिर नर्स उसे लेकर अंदर गई भी या नही.

ये भी पता नहीं चल पाया है कि सीआईए को बिन लादेन परिवार का डीएनए सैंपल लेने में सफलता मिली या नहीं. हालांकि एक सूत्र के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ये योजना विफल रही.

नर्स को इस पूरी योजना के असली कारणों का पता नहीं था इसीलिए वो इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती हैं.

पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी को डॉक्टर की गतिविधियों का पता तब चला जब ऐबटाबाद की अमरीकी कार्रवाई की पड़ताल शुरू हुई.

चुप्पी

इस्लामाबाद ने डॉक्टर की गिरफ़्तारी पर आधिकारिक रूप से कुछ कहने से इंकार कर दिया है. लेकिन गार्डियन की रिपोर्ट में एक उच्च अधिकारी का ये बयान ज़रूर है कि क्या कोई देश वैसे लोगों को गिरफ्तार नहीं करेगा जो विदेशी खुफ़िया सेवा के लिए काम कर रहे हों.

डॉक्टर अफ़रीदी उन कई लोगों में से एक हैं जिन्हें सीआईए की मदद करने के आरोप में आईएसआई ने गिरफ्तार किया है लेकिन माना जा रहा है कि अभी भी सिर्फ़ वही हैं जो हिरासत में हैं.

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Image caption लाल स्याही में ओसामा के कथित नोट्स.

पाकिस्तान इस बाद से बेहद नाराज़ है कि ऐबटाबाद की कार्रवाई के बारे में उसे कुछ नहीं बताया गया था.

रिश्तों में तनाव

अमरीका इस बात से नाराज़ है कि पाकिस्तान इस बात की जांच में ज़्यादा दिलचस्पी ले रहा है कि सीआईए ने चुपचाप इस कार्रवाई को अंजाम कैसे दे दिया और इस बात की चिंता उसे नहीं है कि आख़िर इतने साल ओसामा बिन लादेन ऐबटाबाद में कैसे रह सके.

पिछले दिनों पाकिस्तान को दी जा रही अमरीकी सहायता में कटौती की घोषणा के बाद दोनो देशों के रिश्तों में और तनाव आ गया है. सीआईए ने टीकाकरण योजना पर कुछ भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है.

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