ओसामा: फ़र्ज़ी अभियान बना ख़तरा

पोलयो
Image caption पाकिस्तान के क़बायली इलाक़ों में पोलयो की बूंदों का विरोध किया जाता है.

पाकिस्तान के मेडिकल विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है कि ऐबटाबाद में ओसामा के परिवार का डीएनए लेने के लिए किए गए फ़र्ज़ी अभियान से पाकिस्तान में बीमारियों से बचाव के लिए हो रहे टीकाकरण अभियान पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

कुछ दिन पहले एक ब्रितानी अख़बार गार्डियन ने ख़बर प्रकाशित की थी जिसमें कहा गया था कि अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने उस इलाक़े में फ़र्जी टीका अभियान चलाया था जहां उसे अल-क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन के होने का संदेह था.

अख़बार ने आगे लिखा था कि इस अभियान के ज़रिए सीआईए ओसामा और उनके परिवार के डीएनए सैंपल हासिल करने की कोशिश कर रही थी जिससे उनकी मौजूदगी की ख़बर को पुख़्ता किया जा सके.

अख़बार का दावा है कि सीआईए के अधिकारियों ने ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के परिसर के बारे में पक्की ख़बर मिलने के बाद एक वरिष्ठ स्थानीय डॉक्टर को आस-पास के इलाक़ों में टीकाकरण अभियान चलाने के लिए कहा.

स्वास्थ्य विभाग के पूर्व महा-निदेशक रशीद जमाल ने बीबीसी को बताया कि इस ख़बर से उन इलाक़ों में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं जहाँ पोलियो और दूसरी बीमारियों से बचाव के टीकों और बूंदों को मुसलमानों के ख़िलाफ़ साज़िश समझा जाता है.

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के उन इलाक़ों में जहाँ माता-पिता अपने बच्चों को पोलियो की बूंदें नहीं पिलाते वहाँ अब पोलियो से बचाव की मुहिम तो बिल्कुल ही नहीं चल सकती है.”

'सरकारी अभियान को ख़तरा'

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान में पिछले कई सालों से पोलियो से बचाव का अभियान चलाया जा रहा है और बहुत हद तक इसके ख़ात्मे में सरकार कामयाब भी हो रही है.

सरकारी आँकड़ों के अनुसार पिछले साल देश में पोलियो के 144 केस रिपोर्ट हुए थे और इसी साल के पहले छह महीनों में अब तक 61 केस सामने आ चुके हैं.

डॉ. रशीद जमाल के मुताबिक़ सरकार विभिन्न बीमारियों से बचाव के टीकों और पोलियो की बूंदों के ख़िलाफ़ हो रहे दुष्प्रचार का मुक़ाबला कर रही है और गार्डियन की ख़बर के बाद अब काम ओर मुश्किल हो गया है.

उन्होंने बताया, “सरकार को अब स्पष्ट करना होगा कि उस फ़र्ज़ी अभियान की मंज़ूरी उसने नहीं दी थी और वे भविष्य में इस प्रकार की इजाज़त नहीं देंगे.”

मेडिकल के विशेषज्ञों का कहना है कि पोलियो और दूसरी बीमारियों से बचाव के लिए सरकारी मुहिम के बारे में देश के क़बायली इलाक़ों में जो नकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं उसका सही अंदाज़ा साल के अंत में लगाया जा सकेगा.

संबंधित समाचार