'शांति के लिए मुल्ला उमर ज़रूरी'

मुल्ला उमर(फ़ाईल फोटो) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption तालिबान के एक पूर्व अधिकारी के इस बयान से शांति बहाल करने में कोई मदद मिल सकती है.

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के शासन काल में सऊदी अरब में तालिबान के राजदूत रहे हबीबुल्लाह फ़ौज़ी ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में उस वक़्त तक शांति बहाल नहीं हो सकती जब तक तालिबान के प्रमुख मुल्ला उमर को बातचीत में शामिल नहीं किया जाता.

बीबीसी उर्दू सेवा से एक ख़ास बातचीत में हबीबुल्लाह फ़ौज़ी ने कहा कि पश्चिमी देश अब तालिबान की ताक़त को स्वीकार करते हैं और बातचीत करना चाहते हैं, इसलिए तालिबान के लिए ये अच्छा मौक़ा है कि वो इसमें शामिल हों.

लेकिन उनका साफ़ कहना था कि जब तक तालिबान के प्रमुख मुल्ला उमर इस बातचीत में शामिल नहीं होते उन वार्ताओं की सफलता संभव नहीं है.

उनके अनुसार, ''अफ़ग़ानिस्तान के लोग लड़ाई से तंग आ चुके हैं और अब यही कोशिश है कि पड़ोसी देश ख़ास तौर पर पाकिस्तान की मदद से अफ़ग़ान समस्या का हल निकाला जाए.''

उन्होंने कहा कि मौजूदा जंग पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान दोनों के लिए फ़ायदेमंद नहीं है.

उनके अनुसार, ''दोनों देशों की आर्थिक स्थिति पर इस युद्घ का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है. इसलिए दोनों देशों की मदद से अगर अफ़ग़ानिस्तान में शांति क़ायम हो जाए तो ये पूरे क्षेत्र के लिए अच्छा होगा.''

उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाली के लिए पाकिस्तान का रोल बहुत अहम है. फ़ौज़ी के अनुसार पाकिस्तान के तालिबान के साथ अच्छे संबंध हैं और इसी सिलसिले में उन्हें पाकिस्तान की मदद की ज़रूरत है.

संयुक्त राष्ट्र के ज़रिए चौदह तालिबान नेताओं के नाम को आतंकवादियों की लिस्ट से हटाए जाने के फ़ैसले का स्वागत करते हुए हबीबुल्लाह फ़ौज़ी ने कहा, ये वह लोग हैं जो इस समय युद्घ में हिस्सा नहीं ले रहे हैं और आशा है कि उन लोगों के नाम भी उस लिस्ट से निकाल दिए जाएंगे जो इस समय लड़ाई में शामिल हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में शांति की बहाली के लिए की जा रही कोशिशों के बारे में उन्होंने कहा कि जहां तक शांति परिषद का संबंध है, वो कोशिश कर रही है लेकिन अब तक सिर्फ़ संपर्क स्थापित हुए हैं और विधिवत रूप से बातचीत की शुरूआत अभी नहीं हुई है.

उनके मुताबिक़ इस बात की कोशिश की जा रही है कि तालिबान को बातचीत के लिए तैयार किया जाए.

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