'सैलाब के बाद कम उम्र में शादियां'

मेंहदी
Image caption ऐकशन ऐड के मुताबिक़ 13 साल से कम उम्र की लड़कियां भी बियाही जा रही हैं .

पाकिस्तान पंजाब में सैलाब से प्रभावित हुए लोगों की मदद करने वाली एक स्वंयसेवी संस्था एक्शन एड ने दावा किया है कि इन इलाक़ों में कम उम्र की लड़कियों की शादी किए जाने की घटनाओं में इज़ाफ़ा हुआ है.

एक्शन एड का कहना है कि इसकी वजह है सैलाब पीड़ितों को ठीक तरह से मुआवज़ा न मिल पाना.

ये दावा एक्शन एड से ज़ुड़ी महिलाओं के साथ काम करनेवाली एक संस्था 'तरीमत सांझ' की अधिकारी रिज़वाना परवीन में लाहौर में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान किया है.

संस्था का कहना है कि पहले भी कम उम्र की लड़कियों की शादियां होतीं थीं लेकिन बाढ़ के बाद इनकी संख्या में 20 फ़ीसदी इज़ाफ़ा हुआ है.

छेड़छाड़ भी बढ़ी

बीबीसी संवाददाता एबादुल हक़ का कहना है कि रिज़वाना परवीन ने ये भी कहा कि कई संस्थाएं लड़कियों की सामूहिक विवाहों का आयोजन भी करवा रही हैं जो इसकी वजहों में से एक हो सकती हैं.

उनका कहना था कि लोग अपनी आर्थिक तंगी से परेशान आकर कम उम्र में ही बेटियों की शादियां करने लगे हैं.

रिज़वाना परवीन का कहना था कि लोगों की सोच है कि आज तो संस्थाओं की मदद से शादी हो जाएगी लेकिन अगर ये मौक़ा हाथ से चला गया तो कल को वो बच्चियों की शादियों किस तरह कर पाएंगे?

उनका कहना था कि इसी कारण 11 से 13 साल की लड़कियों की शादियां बड़ी तादाद में की जा रही हैं.

उन्होंनें आरोप लगाया कि अगर सरकार ने लोगों की ठीक तरह से मदद की होती तो ऐसे हालात न पैदा हुए होते कि लोगों को कम उम्र की लड़कियों के विवाह के लिए मजबूर होना पड़ता.

तरीमत सांझ की अधिकारी का कहना था कि लोगों के लिए रहने की उचित व्यवस्था न होने के कारण छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ी हैं.

उन्होंने कहा कि महिलाओं की छेड़छाड़ की घटनाओं में 30 से 40 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है.

प्रेसवार्ता में एक्शन एड ने आरोप लगाया कि सूबे और केंद्र सरकार ने अपने बजटों में इस मद में कोई राशि नहीं आवंटित की है.

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