कराची में फिर हुआ ख़ूनख़राबा

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Image caption पिछले दिनों कराची में सांप्रदायिक हिंसा में सैंकड़ों लोग मारे जा चुके हैं.

पाकिस्तान के दक्षिणी शहर कराची में अधिकारियों का कहना है कि पिछले 24 घंटों में 13 लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी गई है.

पुलिस का कहना है कि मारे गए लोगों की जाति और उनकी राजनीतिक सक्रियतावाद की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया.

पुलिस ने ये भी बताया कि कई शवों पर प्रताड़ना के गहरे निशान हैं, जिससे प्रतीत होता है कि इन्हें मौत के घाट उतारने से पहले प्रताड़ित किया गया था.

कराची में पिछले कई दिनों से जारी सांप्रदायिक हिंसा की कड़ी की ये ताज़ा घटना है.

जुलाई में हुई झड़पों और क़त्ल की घटनाओं में 200 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि इस साल करीब छह-सात महीनों में कराची में 490 लोग मारे जा चुके हैं.

बताया जा रहा है कि इस हिंसा के लिए हथियारबंद गुट ज़िम्मेदार हैं जिन्हें राजनीतिक पार्टियों का समर्थन मिला हुआ है.

अधिकारियों के मुताबिक़ जुलाई में ताज़ा हिंसक घटनाओं का सिलसिला मलीर इलाक़े से उस वक़्त शुरु हुआ, जब मुहाजिर क़ौमी मूवमेंट के कार्यकर्ता अपने घरों को लौट रहे थे और उन पर कुछ अज्ञात लोगों ने गोलीबारी कर दी.

ग़ौरतलब है कि मुहाजिर क़ौमी मूवमेंट कराची का एक राजनीति दल है और वह मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट का प्रतिद्वंद्वी है.

शहर में सत्ता और अपना प्रभाव बनाए रखने के लिए मुहाजिर क़ौमी मूवमेंट और मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट पिछले कई सालों से लड़ रहे हैं.

पूर्व सैन्य शासक परवेज़ मुशर्रफ़ के कार्यकाल में मुहाजिर क़ौमी मूवमेंट के कई कार्यकर्ताओं और नेताओं को गिरफ़्तार किया गया था और कई छिप गए थे.

मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट सत्ता में परवेज़ मुशर्रफ़ के सहयोगी थे.

ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि शांति कायम करने के लिए दोनों राजनीतिक गुटों के नेता आपस में बातचीत कर रहे हैं.

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