'मुझे भारतीय विमान गिराने का अफ़सोस है'

क़ैस
Image caption पाकिस्तानी पायलट ने 1965 में हुई घटना पर संवेदना प्रकट की है.

“मुझे पता चला कि वह भारत का नागरिक विमान था और उसमें आम लोग सवार थे तो मुझे बहुत खेद हुआ और मरने वालों के परिजनों से संवेदना प्रकट करता हूँ.”

यह शब्द पाकिस्तानी वायुसेना के पायलट क़ैस मज़हर हुसैन के हैं जिन्होंने 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में भारत के एक नागरिक विमान को मार गिराया था.

क़ैस मज़हर हुसैन ने जहाँगीर इंजीनियर नाम के भारतीय पायलट की बेटी फ़रीदा सिंह से ई-मेल के ज़रिए संपर्क किया और एक पत्र लिख संवेदना प्रकट की. उन्होंने अपने ई-मेल में उस दिन के घटनाक्रम का विवरण भी दिया है.

1965 के युद्ध के दौरान एक भारतीय मालवाहक विमान कच्छ के रण में भारत और पाकिस्तान की सीमा पर घूम रहा था. क़ैस मज़हर हुसैन ने इस भारतीय विमान को मार गिराया था.

उन्होंने बीबीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा, “कच्छ के रण में मैं भारतीय विमान के काफ़ी पास गया और वह तीन हज़ार फुट पर उड़ान भर रहा था. विमान को देखते ही मैंने अपने अधिकारियों कहा कि यह तो मालवाहक विमान है और यह तो तीन हज़ार फुट की ऊंचाई पर है तो इस का क्या करें. मैं यह सोच रहा था कि मुझे वापस बुला लें और मुझ से यह काम नहीं होता.”

'विमान गिराना थी मजबूरी'

उन्होंने बताया कि वे वहाँ पर थे और उन्हें जो भी आदेश मिला उसको पूरा करना उनका कर्तव्य था और अपने अधिकारियों का आदेश पूरा नहीं करते तो उन्हें सज़ा मिलती.

उन्होंने कहा, “तीन चार मिनट के बाद मुझे कहा गया कि विमान को गिरा दो और मैंने हमला कर विमान को गिरा दिया. जिस तरह से विमान गिरा और उसको आग लग गई तो कोई व्यक्ति भी ज़िंदा नहीं बचा होगा.”

क़ैस मज़हर हुसैन ने बताया कि विमान को गिराने के बाद वे वापस कराची पहुँचे और सब अधिकारियों ने उनकी ख़ूब प्रशंसा की और जब शाम को ऑल इंडिया रेडियो के ज़रिए पता चला कि वह नागरिक विमान था तो उन्हें बहुत अफ़सोस हुआ.

फ़रीदा सिंह को लिखे हुए पत्र का उद्देश्य बताते हुए उन्होंने कहा, “मैंने उनको पत्र इसलिए लिखा क्योंकि मैं अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहता था कि मैं किसी निर्दोष व्यक्ति की हत्या नहीं करता हूँ. मरने वालों के परिजनों से अफ़सोस प्रकट करना मेरा कर्तव्य था.”

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Image caption 1965 के युद्ध में पाकिस्तानी विमान ने भारतीय नागरिक विमान को गिरा दिया था.

'और पत्र लिखने की इच्छा'

ग़ौरतलब है कि क़ैस मज़हर हुसैन ने जिस नागरिक विमान को मार गिराया था उसमें गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता और उनकी पत्नी सहित आठ लोग मारे गए थे.

जब मैंने उन से पूछा कि एक पायलट की बेटी को पत्र लिखने का कोई ख़ास कारण था तो उन्होंने कहा, “मैंने मरने वाले परिजनों को तलाश करने की काफ़ी कोशिश की है और मुझे केवल फ़रीदा सिंह का पता मिला है. मैं कोशिश कर रहा हूँ कि मुख्यमंत्री साहब के किसी रिश्तेदार से संपर्क करूँ और उनसे संवेदना प्रकट करुँ.”

उन्होंने बताया कि फ़रीद सिंह ने उनके पत्र का जवाब दिया है और उन्होंने उनके पत्र को एक सकारात्मक क़दम क़रार दिया है.

क़ैस मज़हर हुसैन के मुताबिक़ उस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों की वे तलाश कर रहे हैं और उनको अगर कोई पता मिलता है तो वे उनको भी संवेदना के पत्र लिखेंगे.

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