'भ्रष्टाचार निरोधक संस्था ख़ुद भ्रष्ट'

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Image caption पाकिस्तान के नेशनल अकाउंटबिलिटी ब्यौरो की 1996 में स्थापना हुई थी.

पाकिस्तान की भ्रष्टाचार निरोधक संस्था नेशनल अकाउन्टेबिलिटी ब्यूरो में करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं.

महालेखा परीक्षक ने संसद में अपनी रिपोर्ट पेश की है जिसमें बताया गया है कि नेशनल अकाउन्टेबिलिटी ब्यूरो में करोड़ों रुपए के घोटालों का पता चला है और यह संस्था भ्रष्टाचार को रोकने में विफल रही है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस उद्देश्य से इस संस्था की स्थापना की गई थी वह पूरा करने में बिल्कुल नाकाम रही है.

महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के मुताबिक़ पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो और अन्य राजनेताओं के ख़िलाफ़ विदेश में दायर मुक़दमों पर 29 करोड़ 13 लाख 62 हज़ार रुपए ख़र्च किए गए लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला.

रिपोर्ट में बताया है कि इस संबंध में न्यायिक मदद प्रदान करने वाली कंपनियों को लाखों डॉलर और ब्रितानी पाउंड का भुगतान किया गया जिसका कोई हिसाब किताब नहीं है.

'कोई हिसाब किताब नहीं'

रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेश में बेनज़ीर भुट्टो के ख़िलाफ़ दायर मुक़दमे में न्यायिक मदद के लिए 12 लाख 66 हज़ार 66 पाउंड का भुगतान किया गया जो 13 करोड़ 63 लाख 96 हज़ार रुपए की रक़म बनती है.

इसके सिवा लंदन में बेनज़ीर भुट्टो की संपत्ति का पता करने के लिए दो लाख एक हज़ार नौ सौ उन्नी पाउंड ख़र्च किए गए.

महालेखा परीक्षक ने बताया कि 19 लाख आठ हज़ार नौ सौ 82 डॉलर एक अज्ञात व्यक्ति या कंपनी को पता नहीं किस उद्देश्य के लिए दिए गए हैं और इसी तरह के अज्ञात व्यक्तियों या कंपनियों को 42 हज़ार दो सौ 91 डॉलर भी दिए हैं जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं है.

महालेखा परीक्षक ने जिस तरह अपनी रिपोर्ट में भ्रष्टाचार निरोधक संस्था में जो भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर किया है उससे यह स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार को रोकने वाली संस्था ख़ुद भ्रष्ट है.

'भ्रष्टाचार को रोकने में नाकाम'

रिपोर्ट में एक जगह लिखा गया है, “हमने यह बात नोट की है कि नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो के कामकाज से भ्रष्टाचार में कोई कमी नहीं हुई है और न ही सरकार को इसका कोई लाभ हुआ है. दुनिया में आज भी पाकिस्तान का नाम सबसे भ्रष्ट देशों में लिया जाता है.”

महालेखा परीक्षक के मुताबिक़ 1996 में नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो की स्थापना से जून 2008 तक इस संस्था ने पाँच अरब 19 करोड़ रुपए ख़र्च किए हैं.

नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो ने नौ सालों में 47 हज़ार से ज़्यादा भ्रष्टाचार के मामलों की कार्रवाई की जिसमें से 28 हज़ार 27 सौ से ज़्यादा सरकारी कर्मचारियों, तीन हज़ार छह सौ से ज़्यादा व्यापारियों, साढ़े 11 सौ राजनेताओं, पौने चार सौ सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों और 13 हज़ार से ज़्यादा अन्य लोगों के ख़िलाफ़ हैं.

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