'डर है बेटा चरमपंथ की ओर न झुक जाए'

सलमा
Image caption कराती की निवासी सलमा बीबी की दो बेटियाँ और एक बेटा है.

''मेरे जीवन का अकेला सहारा मेरा 10 साल का बेटा है. मेरी परेशानी ये है कि कहीं उसका झुकाव उग्र या चरमपंथी विचारधारा की ओर न हो जाए.''

यह शब्द तीन बच्चों की माँ सलमा बीबी के हैं जो कराची के इलाक़े गुलशन-ए-इक़बाल में रहती हैं.

सलमा बीबी की चिंता का बड़ा कारण उनके पति मोहम्मद याक़ूब हैं, जो 11 सिंतबर 2001 को अमरीका में हुए चरमपंथी हमलों के बाद अफ़ग़ानिस्तान चले गए थे और फिर कभी वापस नहीं आ सके.

उन्होंने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, "अमरीका में हुए हमलों के बाद एक दिन मेरे पति बिना कुछ बताए घर से चले गए. कुछ समय बाद एक अज्ञात व्यक्ति के हाथ एक पत्र भेजा जिसमें लिखा हुआ था कि वे अफ़ग़ानिस्तान में हैं और अंतरराष्ट्रीय सेना के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं."

सलमा ने बताया कि इस पत्र के मिलने के कुछ दिनों बाद उनके पिता को किसी अज्ञात व्यक्ति ने बताया कि मोहम्मद याक़ूब अफ़ग़ानिस्तान के इलाक़े क़िलाजंगी में अमरीकी सेना की कार्रवाई में मारे गए हैं और उनका शव वापस नहीं आ सका है.

सलमा बीबी के मुताबिक़ उनके पति ने उन्हें कभी अपने चरमपंथी विचारों के बारे में नहीं बताया था और न ही कभी बताया कि उनकी दोस्ती और जान पहचान कौन से लोगों से है.

ग्यारह सितंबर 2001 के हमलों के बाद जब अमरीकी सेना ने अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़ा कर लिया था तो पाकिस्तान सहित कई इस्लामी देशों से लोग अंतरराष्ट्रीय सेनाओं से लड़ने अफ़ग़ानिस्तान गए थे.

'बढ़ते चरमपंथ से परेशान'

अपने पति के अचानक अफ़ग़ानिस्तान जाने और वहाँ मारे जाने की ख़बर सुनने के बाद सलमा बीबी पाकिस्तान की अनेक माताओं की तरह समाज में बढ़ते हुए चरमपंथी विचारों से परेशान हैं और उन्हें अपने बेटों को बचाने की चिंता है.

सलमा बीबी ने बताया कि उन्हें सबसे ज़्यादा चिंता अपने दस वर्षीय बेटे सलमान की है कि कहीं वह भी अपने पिता की तरह चरमपंथी न बन जाए.

उन्होंने कहा, "इस वक़्त मैं अपने पिता के साथ रह रही हूँ और मेरा बेटा स्कूल में पढ़ाई कर रहा है. अपनी पूरी कोशिश कर रही हूँ कि उन्हे चरमपंथी होने से बचा सकूँ क्योंकि वह मेरा अकेला सहारा है."

पति के मारे जाने के बाद सलमा आर्थिक रुप से भी काफ़ी कमज़ोर हो गई हैं और उनके पिता ही पूरा ख़र्चा बर्दाश्त कर रहे हैं.

अनेक पर्यवेक्षक मानते हैं कि सलमा बीबी जैसे लोगों को सरकार की मदद की ज़रुरत है ताकि उन्हें अपनी औलाद को चरमपंथी विचारों से दूर रखने और समाज में इज़्ज़त दिलाने में मदद मिल सके.

संबंधित समाचार