‘अल-क़ायदा के पाकिस्तानी नेता’ की मौत

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Image caption अमरीका के मुताबिक अबु हफ्स अल-शहरी नाम का यह व्यक्ति पाकिस्तान में अल-क़ायदा की गतिविधियों का मुखिया रहा है.

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान के एक क़बायली इलाके में अल-क़ायदा का एक वरिष्ठ नेता मारा गया है.

अमरीकी अधिकारियों की ओर से अबु हफ्स अल-शहरी नाम का यह व्यक्ति पाकिस्तान में अल-क़ायदा की गतिविधियों का मुखिया रहा है.

अल-शहरी की मौत की खबर उस समय आई है जब गुरुवार को लियोन पनेटा ने चेतावनी दी थी कि अमरीका अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों पर हमला करने वाले पाकिस्तान स्थित चरमपंथियों को रोकने की हरसंभव कोशिश करेगा. हालाँकि उन्होंने इस कार्रवाई के बारे में और ब्यौरा नहीं दिया था.

माना जा रहा है कि अबु हफ्स अल-शहरी अल-क़ायदा और पाकिस्तानी तालिबान के बीच संपर्क सूत्र के रुप में काम करता था.

पाकिस्तान की राजनीति के जानकारों के मुताबिक मुमकिन है कि यह व्यक्ति एक अरब नागरिक हो जिसकी पहचान नहीं की जा सकी थी और जिसकी मौत रविवार को उत्तरी वज़ीरिस्तान में हुए एक अमरीकी ड्रोन हमले में हो गई थी.

जानकारों के मुताबिक चरमपंथी नेताओं को लेकर किए जाने वाले इस तरह के दावों को लेकर सच्चाई की पड़ताल करना मुश्किल होता है और यही वजह है कि ये मौतें अमरीका व पाकिस्तान के बीच अक्सर असहमति और असमंजस की वजह बनती रही हैं.

हालांकि अमरीका ने सार्वजनिक तौर पर इस ड्रोन हमले की पुष्टि नहीं की लेकिन अरब मीजिया में आई खबरों के मुताबिक अल-शहरी की मौत हो गई है और उनके रिश्तारों को इस संबंध में एक गुमनाम फोन आया है. फोन करने वाले अपनी पहचान न बताते हुए कहा कि अबु हफ्स अल-शहरी एक अमरीकी ड्रोन हमले में मारे गए हैं.

अबु हफ्स अल-शहरी, सऊदी अरब के एक 30 वर्षीय व्यक्ति ओसामा हामद गरमन अल-शहरी का नामलेवा है.

अमरीकी अधिकारियों के मुताबिक अल-शहरी अल-क़ायदा की प्रशासनिक प्रणाली में एक अहम भूमिका थी और पाकिसेतानी तालिबान के साथ मिलकर उन्होंने अमरीका के खिलाफ़ कई हमलों की साज़िश रची.

अल-शहरी सऊदी सरकार की ओर से तैयार की गई 85 चरमपंथियों की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में भी शामिल था.

इससे पहले अल-क़ायदा का एक वरिष्ठ कार्यकर्ता अतिया अब्द अल-रहमान भी पाकिस्तान में मारा गया था. लीबियाई मूल का ये चरमपंथी 22 अगस्त पाकिस्तान को वज़ीरिस्तान इलाक़े में मारा गया था.

माना गया था कि अब्द अल-रहमान की मौत से अल-क़ायदा को बहुत नुकसान होगा क्योंकि गुट के नए नेता आयमन अल-ज़वाहिरी उस पर बहुत निर्भर थे.

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