'हक़्क़ानी गुट-पाक सरकार में संबंध के सबूत हैं'

सिराजुद्दीन हक़्क़ानी का पोस्टर
Image caption अमरीका ने हाल ही में पाकिस्तान को हक़्क़ानी नेटवर्क पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी है

पाकिस्तान में अमरीकी राजदूत कैमरन मंटर ने कहा है कि इस बात के सबूत हैं कि अफ़ग़ानिस्तान के प्रमुख चरमपंथी संगठनों में से एक हक़्क़ानी नेटवर्क का संबंध पाकिस्तान सरकार से है.

रेडियो पाकिस्तान को दिए एक साक्षात्कार में कैमरन मंटर ने ये आरोप लगाए हैं.

उल्लेखनीय है कि पिछले हफ़्ते अमरीका ने कहा था कि अगर पाकिस्तानी अधिकारी चरमपंथियों पर कार्रवाई करने में विफल रहते हैं कि वह पाकिस्तान में हक़्क़ानी नेटवर्क पर कार्रवाई कर सकता है.

माना जाता है कि अफ़ग़ानिस्तान में किए गए कई चरमपंथी हमलों में हक़्क़ानी नेटवर्क का हाथ रहा है. इसमें पिछले हफ़्ते मध्य काबुल में हुई 20 घंटों तक चली गोलीबारी शामिल है.

पाकिस्तान सरकार हक़्क़ानी गुट से संबंधों की बात का खंडन करती रही है.

उधर हक़्क़ानी नेटवर्क के कमांडर सिराजुद्दीन हक़्क़ानी ने कहा है कि उनके संगठन को अब पाकिस्तान में शरण स्थलों की ज़रुरत नहीं हैं क्योंकि अब वे अफ़ग़ानिस्तान में ज़्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं.

'सबूत हैं'

अमरीका कहता रहा है कि पाकिस्तान के क़बायली इलाक़ों में हक़्क़ानी नेटवर्क के ठिकाने हैं जहाँ से वे अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के नेतृत्व वाली सेनाओं पर हमले करता रहा है.

शुक्रवार को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तान में अमरीकी राजदूत कैमरन मंटर ने कहा, "कुछ दिनों पहले काबुल में जो हमला हुआ था वह हक़्क़ानी नेटवर्क का कारनामा था. यह एक तथ्य है और हम पहले भी कहते रहे हैं कि इस बात के सबूत हैं कि हक़्क़ानी नेटवर्क का संबंध पाकिस्तान सरकार से है, ये एक ऐसी चीज़ है जिसे ख़त्म करना होगा."

हक़्क़ानी नेटवर्क के तालिबान से गहरे संबंध हैं और उस पर आरोप हैं कि उसने पश्चिमी और भारत सरकार से जुड़े कई ठिकानों पर बड़े हमलों को अंजाम दिया है.

पाकिस्तानी अधिकारी हक़्क़ानी नेटवर्क को अफ़ग़ान गुट कहते हैं लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि इसकी जड़ें पाकिस्तानी इलाक़ों में हैं. पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था से हक़्क़ानी नेटवर्क के संबंधों पर अटकलों का दौर कभी ख़त्म नहीं होता.

अमरीकी अधिकारी इससे पहले भी पाकिस्तान सरकार और हक़्क़ानी नेटवर्क के बीच संबंधों के लेकर संदेह व्यक्त करते रहे हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से इतना स्पष्ट बयान कभी जारी नहीं किया गया था.

इससे पहले जुलाई में अमरीकी सेना के शीर्ष अधिकारी एडमिरल माइक मलेन ने कहा था कि खोजी पत्रकार सलीम शहजाद की हत्या पाकिस्तान सरकार के इशारे पर हुई थी और पाकिस्तान सरकार ने इस बयान को 'ग़ैरज़िम्मेदाराना' क़रार दिया था.

गत मई में पाकिस्तान के ऐबटाबाद में अल-क़ायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद से अमरीका और पाकिस्तान के संबंध तनावपूर्व हो गए हैं.

'अफ़ग़ानिस्तान में ज़्यादा सुरक्षित'

लेकिन हक़्क़ानी नेटवर्क के प्रमुख के बेटे और गुट के कमांडर सिराजुद्दीन हक़्क़ानी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा है कि अब पाकिस्तान में हक़्क़ानी नेटवर्क का कोई ठिकाना नहीं है क्योंकि वे अफ़ग़ानिस्तान में ज़्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं.

किसी अज्ञात स्थान से फ़ोन पर दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "वो दिन गए जब हम पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के पहाड़ों पर शरण लेते थे. अब हम अफ़ग़ानिस्तान के भीतर अफ़ग़ान लोगों के बीच ज़्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं."

शांतिवार्ता से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा है कि वे अफ़ग़ानिस्तान सरकार और अमरीका दोनों से बातचीत के लिए तैयार होंगे यदि तालिबान इसका समर्थन करता है.

रॉयटर्स का कहना है कि इससे पहले हक़्क़ानी नेटवर्क इस तरह की बातचीत को सिरे से ख़ारिज करता रहा है.

हालांकि सिराजुद्दीन हक़्क़ानी ने गुरुवार को काबुल में हुए हमले के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

उनका कहना था कि उन्हें बड़े नेताओं का निर्देश है कि यदि किसी पश्चिमी देश के ठिकाने पर हमला होता है तो वे इस पर टिप्पणी न करें.

विश्लेषकों का कहना है कि अमरीका हक़्क़ानी नेटवर्क की ताक़त को लेकर बहुत चिंतित है क्योंकि अब नैटो की सेनाओं का अफ़ग़ानिस्तान से निकलने का सिलसिला शुरु होने को है.

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