पूजा के लिए खुला पाकिस्तान का मंदिर

पाक मंदिर
Image caption पेशावर का मंदिर करीब 160 साल पुराना है और पिछले 50 सालों से बंद हैं.

पाकिस्तान की एक अदालत ने पेशावर में एक प्राचीन मंदिर में हिंदू समुदाय को पूजा करने की अनुमति दे दी है.

पेशावर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एजाज़ अफ़ज़ल ख़ान की अध्यक्षता में दो सदस्यीय खंडपीठ ने यह आदेश एक हिंदू महिला फूलवती की ओर से दायर की गई याचिका पर दिया.

अदालती आदेश के अनुसार मंदिर की सुरक्षा का ज़िम्मेदारी सरकार की होगी, लेकिन हिंदू समुदाय का कहना है कि उन्हें अभी तक मंदिर का चाबी नहीं मिली है.

स्थानीय हिंदुओं के मुताबिक़ यह मंदिर एक 160 साल पुराना है और यह पेशावर के सबसे पुराने इलाक़े गोरखटड़ी में स्थित है.

ग़ैर सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत में हिंदुओं की जनसंख्या क़रीब 20 हज़ार है और कुछ हिंदू परिवार अफ़ग़ानिस्तान के भी पेशावर पहुँचे हैं.

'मंदिर का निर्माण'

सरकार ने बख़्त मोहम्मद को मंदिर का प्रभारी नियुक्त किया है और उन्होंने बताया कि जबसे यह मंदिर बंद था उस दौरान उसके कई हिस्से ढह गए थे और बाद में सरकार ने मंदिर का फिर से निर्माण किया है.

उन्होंने बताया कि प्रांतीय पुरातत्व विभाग मंदिर की देखभाल कर रहा है और इससे पहले यह मंदिर पुलिस इस्तेमाल कर रही थी.

पेशावर के निवासी रमेश लाल ने बीबीसी को बताया कि यह मंदिर 50 सालों से बंद था और पुलिस ने उस पर कब्ज़ा कर लिया था और उन्हें पूजा के लिए दूसरे शहर जाना पड़ता था.

उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त किया और कहा कि अब वे ख़ुश हैं कि पेशावर शहर में ही मंदिर में पूजा की अनुमति मिल गई है.

'मंदिर की चाबियाँ हिंदुओं को नहीं'

उन्होंने बताया कि हिंदू समुदाय को अभी तक मंदिर की चाबियाँ नहीं मिली हैं और सरकार को चाहिए कि वह मंदिर की चाबियाँ हिंदू समुदाय के हवाले कर दे ताकि मंदिर को फिर से आबाद किया जा सके.

Image caption रमेशा के मुताबिक़ अगर चाबियाँ नहीं मिली तो वह अदालत में याचिका दायर करेंगे.

रमेश लाल का कहना था कि इस वक़्त मंदिर की हालत बहुत ख़राब है और अब तक मंदिर में पूजा शुरू नहीं हो सकी है, क्योंकि चाबियाँ प्रशासन के पास हैं.

उन्होंने कहा कि वे मंदिर की चाबियाँ हासिल करने के लिए अदालत में याचिका दायर करेंगे और अगर चाबियाँ प्रशासन के पास होंगी तो हिंदू पूजा कैसे करेंगे.

मंदिर की चाबियों के सवाल पर एक अधिकारी ने बताया कि प्रशासन ने हिंदुओं को केवल पूजा की अनुमति होगी. इसके अलावा वे न अपने पास चाबियाँ रख सकते हैं और न ही कोई निर्माण का काम कर सकते हैं.

35 वर्षीय शादाब का कहना था कि उन्होंने इस मंदिर को हमेशा बंद देखा है और छोटी उम्र में उनकी इच्छा थी कि मंदिर को पूजा के लिए खोल दिया जाए और अब उनकी इच्छा पूरी हुई है.

पेशवार हाई कोर्ट ने तो मंदिर में हिंदुओं को पूजा की अनुमति दे दी है, लेकिन चाबियों का मामला अभी तक हल नहीं हो सका है.

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