पाकिस्तान में सात को मौत की सज़ा

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Image caption दो भाईयों को पिछले दिन दहाड़े हिंसा का निशाना बनाया गया था जिसके बाद दोनों की मौत हो गई थी.

पाकिस्तान की एक अदालत ने दो भाइयों की मारपीट के बाद हत्या करने के आरोप में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित 22 अभियुक्तों को सज़ा सुनाई है.

गुजराँवाला की आतंकवाद निरोधक अदालत के जज मुश्ताक़ अहमद गोंदल ने दिन दहाड़े दो भाइयों 19 वर्षीय हाफ़िज़ मुग़ीस और 14 वर्षीय मुनीब की हत्या करने के आरोप में सात अभियुक्तों को चार-चार बार मौत की सज़ा और छह अभियुक्तों को चार-चार बार आजीवन कारावास की सज़ा सनाई जबकि अभियुक्तों को जुर्माने के भुगतान का आदेश भी दिया गया.

अदालत ने इस मुक़दमे में सियालकोट के पुलिस प्रमुख वक़ार चौहान सहित नौ पुलिसकर्मियों को तीन, तीन साल क़ैद और 50-50 हज़ार रुपए के जुर्माने की सज़ा सुनाई.

आतंकवाद निरोधक अदालत ने इस मुक़दमे में पाँच अभियुक्तों को शक़ का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया.

'भाइयों की मारपीट'

ग़ौरतलब है कि 15 अगस्त 2010 को पंजाब के शहर सियालकोट में लोगों की एक भीड़ ने दिन दहाड़े दो भाइयों हाफ़िज़ मुग़ीस और मुनीब को रस्सियों से बाँधा और उसके बाद दोनों को हिंसा का निशाना बनाया था.

मारपीट के दौरान दोनों की मौत हो गई थी और बाद में लोगों ने उनके शवों को उलटा लटका कर शहर के गलियों में घुमाया था.

मारपीट के पूरे दृश्यों को एक व्यक्ति ने अपने कैमरे में क़ैद कर लिया था जो बाद में सभी टीवी चैनल पर दिखाया गया था.

उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी ने इस मामले में अपने आप संज्ञान लिया था.

इस घटना का मुक़दमा 20 अगस्त 2010 को दर्ज किया गया था और 21 अगस्त 201 को इसमें आतंकवाद निरोधक क़ानून की धाराएँ शामिल की गई थी.

लाहौर से बीबीसी संवाददाता इबादुल हक़ के मुताबिक़ अदालत ने इस मुक़दमे की सुनवाई करीब एक साल से ज़्यादा तक चलाई.

हाफ़िज़ मुग़ीस और मुनीब के परिजनों ने अदालती फ़ैसले पर संतोष व्यक्त किया है और कहा है कि उन्हें न्याय मिल गया है.

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