अमरीका दबाव नहीं डाल सकता: गिलानी

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Image caption प्रधानमंत्री ने कहा है कि अमरीका को पाकिस्तान के हितों का भी ध्यान रखना होगा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने हक़्क़ानी नेटवर्क को लेकर अमरीकी आरोपों को रद्द करते हुए कहा कि पाकिस्तान पर ‘डू-मोर’ यानी और कार्रवाई करने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता है.

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों अमरीकी वरिष्ठ अधिकारियों ने जो बयान दिए पाकिस्तान के लिए हैरानी का कारण बने और वह आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध में पाकिस्तान के योगदान के बिल्कुल विपरीत थे.

प्रधानमंत्री गिलानी उस बैठक को संबोधित कर रहे थे जो अमरीका की ओर लगाए गए आरोपों के बाद बुलाई गई है.

इस उच्चस्तरीय बैठक में सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी, आईएसआई के प्रमुख लेफ़्टीनेंट जनरल अहमद शुजा पाशा, विदेश मंत्री और दूसरे वरिष्ठ मंत्रियों सहित सभी राजनीतिक और धार्मिक दलों के नेता भाग ले रहे हैं.

यह बैठक इस्लामाबाद के ‘रेड ज़ोन’ में स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में हो रही है, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और सैकड़ों अर्धसैनिक बलों और पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है.

इस बैठक में पत्रकारों को नहीं बुलाया गया है और अधिकारियों का कहना है कि बैठक के बाद एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया जाएगा.

प्रधानमंत्री की ओर से बलाई गई इस बैठक में 30 से ज़्यादा राजनीतिक और धार्मिक दलों के वरिष्ठ नेता भाग ले रहे हैं, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़, मौलाना फ़ज़लुर्रहमान और इमरान ख़ान शामिल हैं.

उल्लेखनीय है कि अमरीकी अधिकारियों ने हाल ही में एक से अधिक बार कहा है कि पाकिस्तानी सरकार के अफ़ग़ानिस्तान के चरमपंथी गुट हक़्क़ानी नेटवर्क से संबंध हैं.

अमरीका पाकिस्तान पर हक़्क़ानी नेटवर्क पर कार्रवाई का दबाव डाल रहा है.

'पाक के हितों का सम्मान करें'

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अमरीका के आरोपों को ख़ारिज करते हुए सकारात्मक रुप से सभी समस्याओं के समाधान की अवश्यकता पर बल दिया और कहा कि आरोपों के बजाए पाकिस्तान के संवेदनशील राष्ट्रीय हितों का सम्मान किया जाना चाहिए.

प्रधानमंत्री ने अमरीका से कहा, “पाकिस्तान पर डू-मोर के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता और हमारे राष्ट्रीय हितों की हर सूरत में सम्मान किया जाना चाहिए, हमारी तरफ़ से बातचीत के लिए सारे द्वार खुले हैं और हमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग की आवश्यकता है.”

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान राजनीतिक और भौगोलिक रुप से एक ऐसे क्षेत्र में स्थित है जिस पर विभिन्न घटनाओं से सीधा प्रभाव पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय हितों के टकराव के कारण भी पाकिस्तान प्रभावित हुआ है.

उन्होंने आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध में पाकिस्तान की उपलब्धियों को गिनवाया और कहा कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों पर चलते हुए शांति के लिए संघर्ष किया है.

प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी के भाषण के बाद विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने उच्च स्तरीय बैठक को सुरक्षा की स्थिति पर जानकारी दी है.

'अमरीका को संदेश'

जानकारों का मानना है कि सरकार की यह कोशिश होगी कि बैठक के बाद एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी कर अमरीका को संदेश दिया जाए कि पाकिस्तान में घुस कर किसी भी कार्रवाई करने का न सोचे.

इस बैठक से पहले गुरुवार देर रात को राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी से मुलाक़ात की, जिसमें प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी भी शामिल थे.

ग़ौरतलब है कि अमरीका के शीर्ष सैन्य अधिकारी एडमिरल माइक मलेन ने कुछ दिन पहले कहा था कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई हक़्क़ानी गुट को इस्तेमाल कर छद्म युद्ध लड़ रही है और उसने काबुल हमले में भी हक़्क़ानी नेटवर्क का समर्थन किया था.

पाकिस्तानी सरकार ने अमरीकी अधिकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों का खंडन किया है और विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर यह चेतावनी दे चुकी हैं कि अगर आरोपों का सिलसिला नहीं रुका तो अमरीका आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध में एक साथी खो सकता है.

अमरीका और पाकिस्तान के बीच में संबंध पिछले कई महीनों से तनावपूर्ण बने हुए हैं.

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