भारत-अफ़ग़ान समझौते पर पाक में चिंता

पाकिस्तानी अख़बार
Image caption अधिकतर अख़बारों ने भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच समझौते को पाकिस्तान केलिए चिंता का विषय बताया है.

पाकिस्तान के सभी अख़बारों ने भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच हुए सामरिक समझौते को प्रमुखता से प्रकाशित किया है और कुछ अख़बारों में इस पर अपने संपादकीय भी लिखे हैं.

अधिकतर अख़बारों ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद क़रज़ई की तस्वीर को भी पहले पन्ने पर स्थान दिया है.

अंग्रेज़ी अख़बार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने ख़बर में लिखा है कि पाकिस्तान से मतभेदों के बीच अफ़ग़ानिस्तान ने पहली बार भारत से सामरिक समझौता किया है जो स्पष्ट रुप से पाकिस्तान के लिए ख़तरे के संकेत हैं.

अख़बार ने लिखा है कि अफ़ग़ानिस्तान ने न केवल भारत से समझौता किया बल्कि राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ एक संयुक्त पत्रकार वार्ता में पाकिस्तान का नाम लिए बिना उस पर हमला बोल दिया.

अख़बार के मुताबिक़ हामिद करज़ई ने कहा कि ‘आतंकवाद और चरमपंथ एक नीति के तौर पर हमारे नागरिकों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल हो रहा है.’

अख़बार ने अपने विश्लेषण में लिखा है कि हक़्क़ानी नेटवर्क को लेकर अमरीका और पाकिस्तान के बीच तनाव से यह स्पष्ट हो गया है कि अमरीका अपने लाभ के लिए भारत को इस्तेमाल कर रहा है.

'पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल'

अंग्रेज़ी के एक और अख़बार ‘पाकिस्तान टुडे’ ने संपादकीय में लिखा है कि भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच हुआ सामरिक समझौता क्षेत्रीय स्थिरता में पाकिस्तान की भूमिका को अंततः ख़त्म कर देगा.

अख़बार लिखता है कि अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय हस्तक्षेप इलाक़े में शांति के लिए हो रहे प्रयासों को गुप्त रुप से हानि पहुँचाएगा और इससे शांतिपूर्ण संबंधों पर भी प्रभाव पड़ेगा.

अख़बार ‘द नेशन’ ने भी भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच हुए सामरिक समझौता की ख़बर को पहले पन्ने पर जगह दी है.

‘द नेशन’ लिखता है कि भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच हुए सामरिक समझौते को पाकिस्तान में संहेद की निगाह से देखा जा रहा है क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय हस्तक्षेप पाकिस्तान के हित में नहीं है.

'युद्ध का उन्माद'

अख़बार ने ‘इंडियन वॉर हिस्टेरिया’ यानी भारत का जंगी जुनून के नाम से संपादकीय प्रकाशित किया है जिसमें लिखा गया है कि भारत करगिल क्षेत्र में फ़ौजी अड्डों का निर्माण कर रहा है जो पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय है.

अख़बार ने पाकिस्तानी सरकार की कड़ी आलोचना की है कि वह कश्मीर मुद्दे के समाधान का रास्ते तलाश करने के बजाए भारत से व्यापार के संबंध बढ़ा रहा है.

उर्दू के अख़बार ‘रोज़नामा जंग’ ने भी इस ख़बर को प्रमुखता से छापा है. ख़बर में है कि अफ़ग़ानिस्तान ने भारत के साथ पहला सामरिक समझौता कर अपने लिए नया साझीदार तलाश कर दिया है.

अख़बार लिखता है कि हामिद करज़ई की उपस्थिति में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान पर सीधा निशाना साधा और कहा कि पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में निर्दोष जानों के नुक़सान का ज़िम्मेदार है.

अख़बारों में इस समझौते को लेकर पाकिस्तान की ओर से कोई प्रतिक्रिया का बयान नज़र नहीं आया है.

संबंधित समाचार