तनाव के बीच बातचीत जारी रखने पर सहमति

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Image caption संबंधों में तनाव के बाद पाकिस्तान और अमरीका ने सामरिक वार्ता जारी रखने का फ़ैसला लिया है.

अमरीका और पाकिस्तान ने हक़्क़ानी नेटवर्क को लेकर उपजे संबंधों में तनाव के बीच सामरिक वार्ता जारी रखने का फ़ैसला लिया है.

दोनों देशों के संबंधों में ताज़ा तनाव का कराण चरमपंथी गुट हक़्क़ानी नेटवर्क है. अमरीका का आरोप है कि वह आईएसआई की मदद से अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद नेटो सेना पर हमले करता रहता है.

इस्लामाबाद स्थित बीबीसी हिंदी संवाददाता हफ़ीज़ चाचड़ के अनुसार पाकिस्तानी सरकार इन आरोपों को पहले ही रद्द कर चुकी है और कह चुकी है कि हक़्क़ानी नेटवर्क का उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई से कोई संपर्क नहीं है.

दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव को कम करने के लिए राष्ट्रपति बराक ओबामा के विशेष दूत मार्क ग्रॉस्मेन ने गुरुवार को इस्लामाबाद में पाकिस्तानी नेतृत्व से मुलाक़ात की.

उन्होंने पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर के साथ संयुक्त पत्रकार वार्ता में बात करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध बहुत ही महत्वपूर्ण हैं और आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका महत्व और भी बढ़ गया है.

उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी घटनाएँ ज़रूर हुई, जिसकी वजह से दोनों देशों के संबंधों में तनाव आ गया लेकिन अब स्थिति बेहतर हो रही है.

'सहयोग जारी रखने पर बल'

मार्क ग्रॉस्मेन के मुताबिक़ दोनों देशों ने बातचीत की प्रक्रिया को जारी रखने और सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आने से पहले उन्होंने मध्य एशिया के देशों, अफ़ग़ानिस्तान, चीन और भारत का दौरा किया और उन देशों ने क्षेत्र की स्थिरता के लिए समर्थन का आश्वासन दिया है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उनका देश इस क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए अपनी रचनात्मक भूमिका अदा करता रहेगा.

मार्क ग्रॉस्मेन ने राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी, प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी और सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी से भी मुलाक़ात की.

ग़ौरतलब है कि मार्क ग्रॉस्मेन इस वर्ष फ़रवरी में रिचर्ड हॉलब्रुक के निधन के बाद पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के लिए अमरीका के विशेष दूत नियुक्त हुए थे.

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